उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति में एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी पिछले कुछ समय से OBC मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं, लेकिन अब उनकी राजनीति का फोकस दलित वोटरों पर ज्यादा नजर आ रहा है। इसके पीछे समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन और मायावती के कमजोर होते राजनीतिक आधार को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी ने अखिलेश यादव के पारंपरिक OBC वोट बैंक से दूरी बनाकर दलित वोटों के लिए अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति अपनाई है?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 के चुनाव को लेकर गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ रही है। संसद भवन में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच इस मुद्दे पर शुरुआती दौर की बातचीत भी हो चुकी है। ऐसे में दोनों दलों के सामने चुनौती सिर्फ सीटों के बंटवारे की नहीं, बल्कि अपने-अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने की भी है।
अखिलेश के OBC आधार से दूरी क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में OBC मतदाता लंबे समय से समाजवादी पार्टी की राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहे हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस भी उसी वोट बैंक में ज्यादा हिस्सेदारी की कोशिश करती है, तो गठबंधन के भीतर राजनीतिक खींचतान की संभावना बढ़ सकती है।
इसी संदर्भ में राहुल गांधी की मौजूदा रणनीति को देखा जा रहा है। राजनीतिक तौर पर यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी के मजबूत OBC आधार को चुनौती देने के बजाय अपना अलग सामाजिक आधार मजबूत करेगी।
इस रणनीति का फायदा दोनों दलों को मिल सकता है। अखिलेश यादव अपने पारंपरिक OBC आधार पर पकड़ बनाए रख सकते हैं, जबकि कांग्रेस उन सामाजिक समूहों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर सकती है, जहां उसका पुराना जनाधार कमजोर हुआ है।
मायावती के वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर
राहुल गांधी की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा दलित वोट बैंक है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं का राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है। लंबे समय तक इस वोट बैंक की सबसे मजबूत राजनीतिक दावेदार मायावती और बहुजन समाज पार्टी रही हैं।
लेकिन पिछले कुछ चुनावों में BSP के प्रदर्शन में गिरावट आई है। 2017 के विधानसभा चुनाव में BSP को 22.23 फीसदी वोट मिले थे और पार्टी ने 19 सीटें जीती थीं। 2022 में उसका वोट शेयर घटकर 12.88 फीसदी रह गया और पार्टी सिर्फ एक सीट जीत सकी।
2024 के लोकसभा चुनाव में दलित मतदाताओं के एक हिस्से ने संविधान और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों के बीच कांग्रेस-सपा गठबंधन का समर्थन किया। अब कांग्रेस इसी समर्थन को 2027 के विधानसभा चुनाव में दोहराने की संभावना तलाश रही है।
राजेंद्र पाल गौतम को यूपी की जिम्मेदारी, रणनीति का संकेत?
कांग्रेस ने दलित राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। गौतम खुद दलित नेता और पूर्व विधायक रहे हैं। उनकी नियुक्ति को कांग्रेस की नई सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
इसके साथ ही राहुल गांधी की पहल पर कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने देश में दलित-मुस्लिम सम्मेलनों की शुरुआत की है।
इससे कांग्रेस की रणनीति के दो पहलू सामने आते हैं। पहला, दलित मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करना। दूसरा, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक संवाद बढ़ाना।
कांग्रेस के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर वह मायावती के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होती है, तो उत्तर प्रदेश में उसकी चुनावी स्थिति बदल सकती है।
2027 में 2024 का समीकरण दोहराने की कोशिश?
पूरी रणनीति को 2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उस चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी साथ थीं और दोनों दलों को इसका राजनीतिक फायदा मिला। अब कांग्रेस की कोशिश इस समीकरण को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की दिखाई दे रही है।
हालांकि विधानसभा चुनाव में जातीय और स्थानीय समीकरण अलग तरह से काम करते हैं। इसलिए 2024 के प्रदर्शन को हूबहू दोहराना आसान नहीं होगा।
फिर भी राहुल गांधी के सामने एक स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य नजर आता है—अखिलेश यादव के साथ गठबंधन को बनाए रखते हुए कांग्रेस के लिए अलग वोट आधार तैयार करना। OBC राजनीति में सपा को चुनौती देने के बजाय दलित वोट बैंक में जगह बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब असली परीक्षा चुनाव के करीब आने पर होगी। क्या कांग्रेस मायावती के कमजोर होते जनाधार का फायदा उठा पाएगी? क्या दलित मतदाता 2024 की तरह कांग्रेस-सपा गठबंधन के साथ जाएगा? और सबसे अहम, क्या अखिलेश के साथ गठबंधन कांग्रेस को अपना अलग सामाजिक आधार बनाने की पर्याप्त जगह देगा?
2027 के चुनाव में इन सवालों के जवाब उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


