शिक्षक दिवस के मौके पर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर योगी सरकार के खिलाफ नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव के निर्देश पर शनिवार को प्रदेशभर में ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान चलाया गया। सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और उन्हें दोबारा शुरू करने की मांग उठाई। पार्टी ने इस अभियान का नारा दिया है—‘बंद स्कूल खुलेगा, तो PDA पढ़ेगा।’ सपा का दावा है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में करीब 26 हजार प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। पार्टी का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, पिछड़े, दलित और वंचित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है।
बंद स्कूलों के बाहर प्रदर्शन, शिक्षा बनी सियासी मुद्दा
सपा ने इस अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जिन इलाकों में प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं, वहां आसपास रहने वाले गरीब और निम्न आय वर्ग के बच्चों के सामने पढ़ाई के लिए दूर जाने की मजबूरी खड़ी हो गई है।
लखनऊ के मध्य विधानसभा क्षेत्र के नरही में भी बंद प्राथमिक विद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। यहां सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्कूल को फिर से खोलने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने प्रदेश की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। उनका तर्क है कि सरकारी स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं हैं। ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों के लिए ये बच्चों की शिक्षा का सबसे सुलभ माध्यम भी हैं। ऐसे में स्कूल बंद होने का असर सीधे परिवारों और बच्चों पर पड़ता है।
अखिलेश बोले- शिक्षा से आती है सामाजिक और राजनीतिक चेतना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभियान को शिक्षा के बड़े सवाल से जोड़ा है। उनके मुताबिक शिक्षा समाज के शोषित, वंचित, गरीब और पीड़ित वर्ग में सामाजिक और राजनीतिक चेतना पैदा करने का काम करती है।
उनका कहना है कि यही चेतना भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने, बराबरी की दिशा में आगे बढ़ने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने का रास्ता तैयार करती है।
इसी वजह से सपा ने बंद स्कूलों के मुद्दे को अपने PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीति से भी जोड़ दिया है। पार्टी का संदेश है कि सरकारी स्कूल मजबूत होंगे तो इन वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
सत्ता में आए तो 24 घंटे में 26 हजार स्कूलों पर फैसला?
‘पाठशाला पुकारे’ अभियान की सबसे बड़ी राजनीतिक घोषणा भी सामने आई है। समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि अगर वह सत्ता में आती है, तो सरकार बनने के 24 घंटे के भीतर बंद किए गए करीब 26 हजार स्कूलों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पार्टी ने यह भी कहा है कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में बंद प्राथमिक विद्यालयों को फिर से शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।
सपा का आरोप है कि भाजपा सरकार की नीतियों से PDA वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर से वंचित किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप सपा के राजनीतिक दावे हैं।
2027 से पहले शिक्षा और PDA पर बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने उससे जुड़े मुद्दों को सामने रखना शुरू कर दिया है। सपा का यह अभियान बताता है कि पार्टी शिक्षा को आने वाले चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
‘पाठशाला पुकारे’ के जरिए सपा एक साथ दो संदेश देने की कोशिश कर रही है। पहला, बंद प्राथमिक विद्यालयों को लेकर सरकार को घेरना। दूसरा, शिक्षा के मुद्दे को PDA और सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़ना।
आम परिवार के लिए इस मुद्दे का सबसे सीधा सवाल स्कूल की दूरी, बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा है। अगर किसी इलाके में सरकारी स्कूल बंद होता है, तो वहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल का रुख करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक मंचों तक सीमित रहता है या वास्तव में चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बनता है, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल शिक्षक दिवस पर शुरू हुआ यह अभियान सपा की ओर से योगी सरकार की शिक्षा व्यवस्था को घेरने की एक स्पष्ट राजनीतिक पहल है। पार्टी ने 26 हजार स्कूलों का आंकड़ा और PDA की शिक्षा को केंद्र में रखकर 2027 की चुनावी बहस के लिए अपना एक अहम मुद्दा सामने रख दिया है।

