प्रयागराज में फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा के दबाव से उफनी यमुना, गंगा का घटाव भी पड़ा धीमा

प्रयागराज में फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा! चंबल-बेतवा के दबाव से उफनी यमुना, गंगा का घटाव भी पड़ा धीमा

प्रयागराज में बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों से घट रही यमुना अब दोबारा बढ़ने लगी है, जबकि गंगा के जलस्तर में कमी की रफ्तार भी आधी हो गई है। चंबल और बेतवा में बढ़े पानी का दबाव अब यमुना पर दिखाई दे रहा है। सिंचाई विभाग ने आने वाले दिनों में यमुना के जलस्तर में 50 सेंटीमीटर से एक मीटर तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। ऐसे में गंगा-यमुना के जलस्तर पर निगरानी और बढ़ा दी गई है।

प्रयागराज में हालात इसलिए भी अहम हैं क्योंकि यहां नदियों के जलस्तर में मामूली बदलाव का असर आसपास के ग्रामीण इलाकों, सड़कों और खेती पर पड़ता है। इस बार पहले ही बाढ़ और बारिश से जिले के कई हिस्सों में नुकसान हो चुका है। अब नदियों का रुख फिर बदलने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

तीन दिन बाद फिर बढ़ने लगी यमुना

नैनी में पिछले तीन दिनों से यमुना का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा था। मंगलवार सुबह से इसमें बदलाव दिखा। पहले जलस्तर घटने की रफ्तार कम हुई। शाम चार बजे तक चार घंटे में यमुना का पानी करीब एक सेंटीमीटर बढ़ गया। रात आठ बजे तक बढ़ोतरी की रफ्तार और तेज हो गई। इस दौरान महज चार घंटे में जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़ा

इसके पीछे बड़ी वजह चंबल और बेतवा में बढ़ा पानी माना जा रहा है। पिछले दिनों दोनों नदियों के जलस्तर में व्यापक बढ़ोतरी हुई थी। चंबल का असर खास तौर पर सामने आया। इटावा में दो दिनों के भीतर चंबल का जलस्तर करीब 11 मीटर तक बढ़ गया था

अब इसका दबाव यमुना पर पड़ रहा है। यमुना के बढ़ते जलस्तर का असर गंगा पर भी महसूस होने लगा है।

गंगा का घटाव भी हुआ आधा, आगे क्या होगा?

छतनाग में गंगा के प्रवाह पर यमुना के बढ़े जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। सुबह गंगा का पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। अब यह रफ्तार घटकर लगभग आधा सेंटीमीटर प्रति घंटा रह गई है।

हालांकि, फिलहाल टोंस नदी का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता निखिल प्रसाद के मुताबिक, इससे कुछ राहत की स्थिति बनी हुई है। लेकिन यमुना को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। विभाग ने जलस्तर में 50 सेंटीमीटर से एक मीटर तक की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।

इसके अलावा कानपुर बैराज से गंगा में डिस्चार्ज बढ़ाए जाने का असर भी करीब दो दिन बाद फाफामऊ में दिखाई दे सकता है। बुधवार को जलस्तर की स्थिति ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसलिए प्रशासन और सिंचाई विभाग ने नदियों की निगरानी बढ़ा दी है।

बाढ़ ने 80 सड़कों को पहुंचाया नुकसान

नदियों और बारिश के कारण सिर्फ जलस्तर ही चिंता का विषय नहीं है। मेजा, करछना और कोरांव में करीब 80 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पीडब्ल्यूडी की टीमें अब इन सड़कों का सर्वे कर रही हैं।

सर्वे में यह देखा जा रहा है कि सड़क या संपर्क मार्ग कितनी दूरी तक खराब हुआ है और उसे ठीक करने में कितना खर्च आएगा। विभाग को सात दिनों के भीतर सर्वे रिपोर्ट लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजनी है।

जहां सामान्य मरम्मत से सड़क ठीक हो सकती है, वहां काम कराया जाएगा। वहीं, ज्यादा नुकसान वाली सड़कों के लिए विशेष मरम्मत योजना के तहत प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट मंजूर होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

खेतों में पानी से किसानों की चिंता बढ़ी

बाढ़ और लगातार बारिश का असर खेती पर भी पड़ा है। गंगा-यमुना और सहायक नदियों के बढ़े जलस्तर से खरीफ की फसलों को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने के कारण धान समेत दूसरी फसलें प्रभावित हुई हैं।

मेजा, कोरांव और बारा तहसील में नुकसान ज्यादा होने की आशंका है। प्रशासन ने सभी तहसीलों में राजस्व अधिकारियों की टीमें लगाकर फसल क्षति का सर्वे शुरू कराया है। एसडीएम और तहसीलदारों को मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेजा में लंबे समय तक खेतों में पानी भरे रहने से धान की फसल खराब हुई है। फूलपुर और दूसरे ग्रामीण इलाकों में भी जलभराव ने खड़ी फसलों को प्रभावित किया है।

किसानों को कितनी राहत मिलेगी, इसका फैसला सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होगा। कृषि निवेश अनुदान और अन्य राहत की तस्वीर भी वास्तविक नुकसान सामने आने के बाद साफ होगी। फिलहाल जिले में कितने हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई और कुल आर्थिक नुकसान कितना है, इसका अंतिम सरकारी आंकड़ा जारी नहीं हुआ है।

यानी प्रयागराज में फिलहाल सबसे बड़ी नजर यमुना और गंगा के अगले जलस्तर पर है। बुधवार के आंकड़े यह तय करने में अहम होंगे कि नदी का बढ़ता दबाव महज अस्थायी है या आने वाले दिनों में बाढ़ का खतरा और गंभीर हो सकता है।