यूपी के इन 10 जिलों में 10 साल में पलट गया सीटों का गणित, 88 सीटों ने बदली पूरी तस्वीर

यूपी के इन 10 जिलों में 10 साल में पलट गया सीटों का गणित, 88 सीटों ने बदली पूरी तस्वीर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तस्वीर सिर्फ लखनऊ या पूरे प्रदेश के कुल आंकड़ों से नहीं समझी जा सकती। कई बार कुछ जिलों का सीटवार प्रदर्शन राज्य के बड़े राजनीतिक बदलाव को समझने का अहम आधार बन जाता है। 2012 और 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के 10 जिलों की 88 सीटों पर ऐसा ही बदलाव दिखाई देता है। इन जिलों में अलीगढ़, कानपुर, प्रयागराज, उन्नाव, देवरिया, गोंडा, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2012 में इन क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी ने कुल 61 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में बीजेपी ने 78 सीटें अपने नाम कीं।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन आंकड़ों को इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि एक दशक के भीतर इन जिलों में सीटों का पार्टीवार वितरण काफी बदला है। हालांकि, ये आंकड़े केवल 2012 और 2022 के चुनावों के बीच का अंतर दिखाते हैं। इनके आधार पर 2027 के नतीजे को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

88 सीटों वाले इन जिलों में कैसे बदला चुनावी नक्शा?

इन 10 जिलों में कुल 88 विधानसभा सीटें हैं। 2012 के चुनाव में इन सीटों के बड़े हिस्से पर समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा था। दस साल बाद 2022 में तस्वीर काफी अलग नजर आई और बीजेपी ने इन जिलों की 78 सीटों पर जीत दर्ज की।

यानी 2012 से 2022 के बीच इन इलाकों का सीटवार वितरण काफी बदल गया। अलग-अलग जिलों के आंकड़े देखें तो यह बदलाव और साफ दिखाई देता है।

अलीगढ़ में सात विधानसभा सीटें हैं। 2012 में सपा ने चार सीटें जीती थीं। 2022 में बीजेपी ने जिले की सभी सात सीटों पर जीत दर्ज की।

देवरिया में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। यहां सात सीटों में 2012 में सपा के पास पांच सीटें थीं। 2022 में बीजेपी ने सभी सात सीटें जीत लीं।

गोंडा में 2012 में सपा ने छह सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली थी। 2022 में बीजेपी ने जिले की सातों सीटों पर जीत दर्ज की।

उन्नाव, लखीमपुर और हरदोई में भी बदली तस्वीर

उन्नाव की छह विधानसभा सीटों में 2012 में सपा ने पांच सीटें जीती थीं। 2022 में बीजेपी ने सभी छह सीटें अपने खाते में दर्ज कीं।

लखीमपुर खीरी में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। 2012 में सपा को चार सीटें मिली थीं। 2022 में बीजेपी ने सातों सीटें जीत लीं।

हरदोई की आठ सीटों का आंकड़ा भी खासा अलग रहा। 2012 में सपा ने छह सीटें जीती थीं, जबकि दो सीटें बसपा के खाते में गई थीं। 2022 में बीजेपी ने सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की।

सीतापुर में नौ विधानसभा सीटें हैं। 2012 में सपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी। 2022 में बीजेपी ने आठ सीटें जीतीं और सपा को एक सीट मिली।

इन आंकड़ों से साफ तौर पर इतना पता चलता है कि इन जिलों में 2012 और 2022 के बीच विधानसभा सीटों का पार्टीवार वितरण एक जैसा नहीं रहा।

लखनऊ और कानपुर का गणित भी बदला

राजधानी लखनऊ की नौ विधानसभा सीटों पर भी दशक के दौरान बदलाव दिखाई देता है। 2012 में सपा ने यहां सात सीटें जीती थीं। 2022 में बीजेपी को सात सीटें मिलीं, जबकि सपा दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।

कानपुर शहर और कानपुर देहात को मिलाकर कुल 14 विधानसभा सीटें हैं। 2012 में सपा ने इन दोनों जिलों में आठ सीटें जीती थीं। 2022 में बीजेपी ने 14 में से 11 सीटों पर जीत हासिल की।

इस तरह राजधानी से लेकर औद्योगिक क्षेत्र माने जाने वाले कानपुर तक सीटों के वितरण में बड़ा अंतर दर्ज हुआ।

प्रयागराज का आंकड़ा भी बताता है कितना बदला समीकरण

प्रयागराज में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं। 2012 में सपा ने इनमें से आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2022 में बीजेपी ने भी आठ सीटें जीतीं।

हालांकि, यहां सीटों की संख्या समान रहने के बावजूद वोट हिस्सेदारी के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा का वोट शेयर करीब 28.7 फीसदी था, जबकि 2022 में बीजेपी का वोट शेयर करीब 56.8 फीसदी रहा। यह आंकड़ा पूरे जिले की विधानसभा सीटों पर पार्टी को मिले कुल वोटों का है।

यूपी की राजनीति में इन 10 जिलों की अहमियत को समझने के लिए यही आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। कुल 88 विधानसभा सीटों वाला यह समूह 2012 और 2022 के बीच सीटवार बदलाव की एक स्पष्ट तस्वीर सामने रखता है। 2027 के चुनाव से पहले इन आंकड़ों पर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि पिछले चुनावों में इन क्षेत्रों का राजनीतिक वितरण एक जैसा नहीं रहा है। लेकिन अगला चुनाव किस दिशा में जाएगा, यह इन पुराने आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता।