कंझावला केस में अमित खन्ना को बड़ा झटका, 13 KM तक घसीटी गई थी युवती, हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

कंझावला केस में अमित खन्ना को बड़ा झटका, 13 KM तक घसीटी गई थी युवती, हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

कंझावला हिट-एंड-रन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी अमित खन्ना की रेगुलर जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह वही मामला है, जिसमें 20 साल की एक युवती की मौत हो गई थी और आरोप है कि टक्कर के बाद उसका शरीर कार के नीचे फंस गया था। इसके बाद कार करीब 13 किलोमीटर तक चलती रही। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले की परिस्थितियों और कथित अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने यह आदेश सुल्तानपुरी थाने में दर्ज FIR के संबंध में दिया। FIR में IPC की धाराओं 302, 201, 212, 182, 34 और 120B के तहत आरोप दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने पांच अतिरिक्त CCTV फुटेज के लिंक भी अदालत के सामने रखे। खुले कोर्ट में इन फुटेज को चलाकर देखा गया।

पहले सड़क हादसे की FIR, जांच आगे बढ़ी तो बदल गई पूरी कहानी

पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में मामला सड़क दुर्घटना के तौर पर दर्ज किया गया था। FIR अमित खन्ना के चचेरे भाई दीपक के खिलाफ IPC की धारा 279 और 304A के तहत दर्ज हुई थी।

लेकिन जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने दावा किया कि हादसे के वक्त कार दीपक नहीं, बल्कि अमित खन्ना चला रहा था। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि युवती को टक्कर लगने के बाद उसका शरीर कार के नीचे फंस गया था।

इसके बावजूद वाहन चलता रहा और युवती को करीब 13 किलोमीटर तक घसीटे जाने की बात सामने आई। इसके बाद मामले में धाराएं बदली गईं और IPC की धारा 302 तथा 201 भी जोड़ी गईं।

यही वह पहलू है जिसे हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय गंभीरता से देखा।

CCTV में चेहरा साफ नहीं, लेकिन कार को लेकर कोर्ट के सामने आया अहम तथ्य

अमित खन्ना की ओर से अदालत में दलील दी गई कि CCTV फुटेज में घटना के ठीक समय उनका चेहरा दिखाई नहीं देता। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उन्हें 1 जनवरी 2023 से हिरासत में रखा गया है और उन्हें कथित हत्या से जोड़ने वाला पर्याप्त सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है।

वकील ने यह तर्क भी रखा कि 1 से 6 जनवरी 2023 के बीच खन्ना के खिलाफ उस वाहन को चलाने के आरोप में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था।

इसके अलावा बचाव पक्ष ने निधि के बयान पर भी सवाल उठाए। निधि उस समय मृतका के स्कूटर पर पीछे बैठी थी। बचाव पक्ष के मुताबिक, खन्ना को ड्राइवर के तौर पर पहचानने का दावा उसके तीसरे बयान में सामने आया, जो घटना के करीब एक सप्ताह बाद दर्ज हुआ था।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यह बयान सह-आरोपी आशुतोष के 6 जनवरी 2023 को दर्ज बयान के बाद सामने आया। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के नतीजे रिकॉर्ड पर नहीं रखे जाने और CCTV में घटना के वक्त खन्ना का चेहरा स्पष्ट नहीं होने की दलील भी दी गई।

DNA रिपोर्ट और गवाह के बयान पर भी हुई अदालत में चर्चा

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए मामले की परिस्थितियों और कथित अपराध के तरीके पर जोर दिया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कार में मौजूद खन्ना और उसके साथियों ने कुछ दूरी तक युवती को घसीटे जाने के बाद वाहन से उतरकर स्थिति देखी थी।

पुलिस के दावे के मुताबिक, उन्होंने कार के नीचे फंसे शव को देखा, लेकिन इसके बाद भी वाहन चलाया गया।

अभियोजन ने अपने पक्ष में CCTV फुटेज, निधि के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों का हवाला दिया। अदालत को यह भी बताया गया कि कार से बरामद मांस के नमूने का DNA मृतका के DNA से मैच हुआ था।

इसके अलावा अभियोजन ने यह तथ्य भी सामने रखा कि खन्ना ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड यानी TIP में शामिल होने से इनकार किया था।

निधि के बयान की अदालत ने भी जांच की। कोर्ट ने नोट किया कि उसने मृतका के नशे में होने की बात कही थी। साथ ही उसने यह भी बताया था कि खन्ना और कार में मौजूद दूसरे लोग भी काफी नशे में थे।

हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत?

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने CCTV फुटेज से सामने आने वाले तथ्यों पर विशेष ध्यान दिया। अदालत के अनुसार, फुटेज से यह दिखाई देता है कि घटना वाली कार खन्ना को चलाने के लिए दी गई थी।

अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री के अनुसार, युवती को टक्कर लगने और उसके शरीर के कार के नीचे फंसने के बाद भी वाहन चलाया गया। कोर्ट के मुताबिक, खन्ना बाद में रुका और कार से बाहर निकला, लेकिन युवती के कार के नीचे फंसे होने की जानकारी होने के बावजूद वाहन करीब 13 किलोमीटर तक चलाया गया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि CCTV में घटना के ठीक समय आरोपी का चेहरा दिखाई नहीं देता। लेकिन जमानत के स्तर पर अदालत ने पूरे रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और फोरेंसिक सामग्री को साथ रखकर देखा।

इन परिस्थितियों को देखते हुए जस्टिस कठपालिया ने कहा कि कथित हत्या की गंभीरता और जिस तरीके से घटना हुई, वह आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अमित खन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी।

Case: AMIT KHANNA v. STATE GOVT OF NCT OF DELHI