Asian Games 2026 में टीम इंडिया ने क्यों नहीं पहनी BCCI की जर्सी? वजह सिर्फ रंग नहीं, पूरा नियम है

Asian Games 2026 में टीम इंडिया ने क्यों नहीं पहनी BCCI की जर्सी? वजह सिर्फ रंग नहीं, पूरा नियम है

Asian Games 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम जब जापान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए मैदान पर उतरी, तो एक चीज ने क्रिकेट फैंस का ध्यान खींच लिया। खिलाड़ियों की जर्सी वैसी नहीं थी, जैसी आमतौर पर टीम इंडिया की द्विपक्षीय सीरीज या ICC टूर्नामेंट में दिखाई देती है। न तो BCCI की पहचान वाली सामान्य जर्सी नजर आई और न ही उस पर उसी तरह के कमर्शियल स्पॉन्सर लोगो दिखे। सवाल स्वाभाविक था कि आखिर एशियन गेम्स में टीम इंडिया की जर्सी क्यों बदल गई?

इसका जवाब क्रिकेट के प्रदर्शन से ज्यादा मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट के नियमों में छिपा है। Asian Games में भारतीय क्रिकेट टीम सीधे BCCI की टीम के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय दल का हिस्सा बनकर मैदान में उतरती है। इसलिए यहां जर्सी और किट को लेकर अलग व्यवस्था लागू होती है।

BCCI की जर्सी से अलग क्यों है Asian Games की किट?

ICC टूर्नामेंट या किसी द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज में भारतीय टीम BCCI के प्रतिनिधित्व में खेलती है। इसलिए खिलाड़ियों की जर्सी पर BCCI से जुड़ी पहचान, किट डिजाइन और कमर्शियल स्पॉन्सर दिखाई दे सकते हैं।

Asian Games का ढांचा इससे अलग है। यहां क्रिकेट टीम भारत के पूरे खेल दल का हिस्सा होती है। यानी क्रिकेटर सिर्फ क्रिकेट बोर्ड का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि भारतीय दल के सदस्य के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसी वजह से एशियन गेम्स जैसे बड़े मल्टी-स्पोर्ट्स आयोजन में व्यक्तिगत खेल संघ की पहचान के बजाय राष्ट्रीय ओलंपिक एसोसिएशन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है। भारत के मामले में यह जिम्मेदारी Indian Olympic Association यानी IOA से जुड़ी है।

यही कारण है कि एशियन गेम्स में टीम इंडिया की जर्सी BCCI की नियमित इंटरनेशनल क्रिकेट जर्सी से अलग दिखाई देती है।

एक ही देश, लेकिन सभी खिलाड़ियों के लिए किट का नियम एक

एशियन गेम्स में सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और क्रिकेट जैसे अलग-अलग खेलों के बावजूद भारतीय दल की एक समान राष्ट्रीय पहचान बनाए रखना जरूरी होता है।

इसके लिए आधिकारिक किट को लेकर एक निर्धारित व्यवस्था होती है। डिजाइन, रंग और फैब्रिक से जुड़ी शर्तों के मुताबिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय किट पहननी होती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि मैदान पर उतरने वाला पूरा भारतीय दल एक साझा राष्ट्रीय पहचान के साथ दिखाई दे। किसी एक खेल संघ की अलग ब्रांडिंग इस पहचान पर हावी न हो।

इसलिए क्रिकेटर होने के बावजूद एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम को BCCI की सामान्य जर्सी में खेलने की अनुमति नहीं होती।

BCCI की जर्सी पर लगे स्पॉन्सर लोगो भी बड़ी वजह

जर्सी बदलने की दूसरी अहम वजह कमर्शियल ब्रांडिंग है। BCCI की सामान्य जर्सी पर किट मैन्युफैक्चरर और कमर्शियल स्पॉन्सर के लोगो होते हैं। क्रिकेट की सामान्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इन लोगो का इस्तेमाल व्यावसायिक साझेदारियों का हिस्सा होता है।

लेकिन मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट में ऐसी कमर्शियल ब्रांडिंग को लेकर अलग नियम लागू होते हैं। दिए गए मामले में OCA और IOC से जुड़े नियमों के तहत निजी बोर्ड के कमर्शियल स्पॉन्सर को जर्सी पर प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है।

इसका मतलब यह नहीं है कि BCCI की पहचान या उसकी जर्सी किसी सामान्य क्रिकेट मुकाबले में बदल गई है। मामला सिर्फ उस प्रतियोगिता की नियमावली से जुड़ा है, जिसमें भारतीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

फैंस के लिए क्या समझना जरूरी है?

टीम इंडिया की जर्सी को देखकर कई बार यह सवाल उठ सकता है कि क्या टीम की पहचान बदल गई है। लेकिन Asian Games में जर्सी का अलग होना इसी प्रतिनिधित्व व्यवस्था का हिस्सा है।

द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज और ICC टूर्नामेंट में खिलाड़ी BCCI के क्रिकेट प्रतिनिधित्व के तहत मैदान में उतरते हैं। वहीं Asian Games में वही खिलाड़ी भारतीय राष्ट्रीय दल का हिस्सा होते हैं।

इसलिए जर्सी का डिजाइन और उस पर दिखाई देने वाली ब्रांडिंग भी उसी व्यवस्था के मुताबिक तय होती है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम का जापान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में अलग किट में उतरना इसी नियम का परिणाम है। मैदान पर जर्सी भले BCCI वाली न हो, लेकिन खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व भारत के लिए ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि प्रतियोगिता का ढांचा और उसके किट नियम अलग हैं।