UP Birth Death Certificate: 2 साल से पुराने प्रमाण पत्र के आवेदन लौटाए जा रहे, हजारों लोग परेशान

UP Birth Death Certificate: 2 साल से पुराने प्रमाण पत्र के आवेदन लौटाए जा रहे, हजारों लोग परेशान

उत्तर प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। प्रदेश की कई तहसीलों में 26 अगस्त से ऐसे आवेदन वापस किए जा रहे हैं। अधिकारियों की ओर से केंद्र सरकार के नए गजट का हवाला देकर दो साल से पुराने मामलों को कोर्ट से निस्तारित कराने की बात कही जा रही है।

मामला इसलिए पेचीदा है क्योंकि संबंधित गजट में नए प्रावधानों के लागू होने की तारीख केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक राजपत्र में अलग से अधिसूचित किए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद कई तहसीलों में आवेदन वापस किए जाने से लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

लखनऊ में ही तहसीलों से 12 हजार से अधिक आवेदन वापस किए जाने का दावा किया गया है। सदर तहसील में रोज करीब 200 आवेदन पहुंच रहे हैं और अब तक लगभग 8 हजार आवेदन लौटाए जा चुके हैं।

अभिभावकों और वारिसों की बढ़ी परेशानी

जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनने से कई बच्चों का स्कूलों में दाखिला अटक रहा है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में वारिसों को बैंकिंग और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने में दिक्कत हो रही है।

नए प्रावधानों के मुताबिक एक से दो साल की देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति का प्रावधान बताया गया है। दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता बताई गई है।

फिलहाल लखनऊ की सदर, मलिहाबाद, बीकेटी और सरोजनीनगर समेत कई तहसीलों में आवेदकों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सदर तहसील के एसडीएम साहिल कुमार के मुताबिक, दो साल से अधिक पुराने मामले नई व्यवस्था के तहत कोर्ट से निस्तारित किए जाने हैं। हालांकि जरूरी मामलों में प्रमाण पत्र बनाए जाने की बात भी कही गई है।