बांका कांड पर बिहार में सियासी घमासान, तेजस्वी का सरकार पर हमला, चिराग बोले- सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं रुकेगा अपराध

बांका कांड पर बिहार में सियासी घमासान, तेजस्वी का सरकार पर हमला, चिराग बोले- सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं रुकेगा अपराध

बिहार के बांका के मंदार पर्वत से नाबालिग लड़की के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। जमुई और समस्तीपुर के बाद सामने आई इस घटना को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल आरोपियों की गिरफ्तारी या मुठभेड़ से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की, जिनके क्षेत्र में ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

मंदार पर्वत से सामने आए वीडियो में कुछ युवक एक नाबालिग लड़की को घेरते और उसके साथ कथित तौर पर बदसलूकी करते दिखाई देने का दावा किया गया है। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है।

बांका के बाद तेजस्वी ने सरकार से पूछे कई सवाल

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिहार में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां दर्ज मामलों में आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और बांका मामले में कार्रवाई कब तक होगी।

तेजस्वी ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अपराधियों की सामाजिक या जातीय पहचान देखकर कार्रवाई की प्राथमिकता तय की जा रही है।

हालांकि ये तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से साबित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। सरकार या संबंधित प्रशासन का जवाब इस मुद्दे का अहम हिस्सा रहेगा।

तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली और पुलिस व्यवस्था में कथित हस्तक्षेप को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि इससे न्याय व्यवस्था और समाज में कानून के भरोसे पर असर पड़ रहा है।

चिराग बोले- सिर्फ गिरफ्तारी या एनकाउंटर काफी नहीं

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी बिहार में नाबालिग लड़कियों से जुड़ी घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

चिराग ने जमुई की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय सांसद अरुण भारती ने मामले में तेजी से कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, उस मामले में गिरफ्तारियां हुईं और पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगी थी।

समस्तीपुर मामले में भी पुलिस की ओर से गिरफ्तारी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए चिराग ने कहा कि सिर्फ गिरफ्तारी या मुठभेड़ से ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी।

उनका जोर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर रहा। चिराग ने कहा कि जिन अधिकारियों के क्षेत्र में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात कही।

जमुई से बांका तक लगातार सामने आ रहे मामले

बिहार में हाल के दिनों में नाबालिग लड़कियों से जुड़ी तीन घटनाओं ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चिंता बढ़ाई है।

पहला मामला जमुई के मड़वा पहाड़ी से सामने आया था। वहां एक छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नंदन यादव को कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी थी।

इसके अगले दिन समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम क्षेत्र में एक लड़की से छेड़खानी का मामला सामने आया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

अब बांका के मंदार पर्वत से सामने आए वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। वायरल वीडियो में तीन से चार युवकों द्वारा लड़की को घेरकर डराने-धमकाने का दावा किया गया है।

इन घटनाओं ने खास तौर पर सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों पर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

अब कार्रवाई पर टिकी नजर, अधिकारियों की जवाबदेही भी मुद्दा

बांका मामले में अब सबसे अहम सवाल पुलिस की अगली कार्रवाई को लेकर है। वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

चिराग पासवान की टिप्पणी ने इस बहस को एक और दिशा दी है। उनका कहना है कि अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, अगर अधिकारियों की मौजूदगी या निगरानी के बावजूद अपराधी दिनदहाड़े ऐसी हरकत करने की हिम्मत कर रहे हैं, तो व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

वहीं तेजस्वी यादव ने इन घटनाओं को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस तरह बांका की घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था, पुलिस की जवाबदेही और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।

फिलहाल, मामले में आगे की पुलिस कार्रवाई और आधिकारिक जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।