गुजरात की राजनीति के पुराने और चर्चित चेहरों में शामिल शंकरसिंह वाघेला एक बार फिर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सुर्खियों में हैं। 86 साल की उम्र में वाघेला ने कांग्रेस में लौटने की इच्छा जताई है। इसी के साथ 2 अक्टूबर से नई पार्टी के जरिए राजनीतिक अभियान शुरू करने की उनकी योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वाघेला के साथ पार्टी की सकारात्मक बातचीत हुई है, लेकिन उनकी संभावित वापसी के बाद उन्हें क्या भूमिका दी जाएगी, इस पर अभी कांग्रेस आलाकमान से चर्चा होना बाकी है।
वाघेला का कांग्रेस से रिश्ता नया नहीं है। वह पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री तक बने। लेकिन पिछले तीन दशकों में उनका राजनीतिक सफर भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और अपने अलग राजनीतिक मंचों से होकर गुजरा है। ऐसे में अगर उनकी कांग्रेस में वापसी होती है तो यह गुजरात की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जाएगा।
नई पार्टी के प्लान पर लगा ब्रेक, कांग्रेस से बातचीत क्यों?
शंकरसिंह वाघेला ने हाल ही में अपनी प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी को फिर से सक्रिय किया था। उनका इरादा 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अपने संगठन के साथ मैदान में उतरने का था।
वाघेला ने पहले यह भी कहा था कि कांग्रेस में वापस जाने का समय निकल चुका है और वह अपना चुनावी रास्ता खुद के राजनीतिक मंच से तय करेंगे। लेकिन अब उनके रुख में बदलाव की खबर सामने आई है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी और वाघेला के बीच बातचीत हुई है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सबसे अहम सवाल उनकी भूमिका को लेकर है। पार्टी में उनकी वापसी होने पर उन्हें संगठन या चुनावी राजनीति में किस तरह जिम्मेदारी दी जाएगी, इस पर कांग्रेस नेतृत्व को फैसला करना होगा।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने भी कहा है कि वाघेला की वापसी को लेकर हाई कमांड के साथ बातचीत चल रही है।
भाजपा से लेकर कांग्रेस और एनसीपी तक, लंबा रहा राजनीतिक सफर
शंकरसिंह वाघेला का राजनीतिक सफर कई बड़े मोड़ों से गुजरा है। 1995 में उन्होंने भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJP) बनाई थी। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद 1998 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी छोड़ दी। उनके साथ कई विधायक भी कांग्रेस से बाहर आए।
इसके बाद वाघेला ने जन विकल्प मोर्चा बनाया। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनके संगठन का कोई उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका।
यह दौर उनके राजनीतिक जीवन में एक और स्वतंत्र राजनीतिक प्रयोग का था। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई।
2019 में NCP, फिर अपनी पार्टी और अब कांग्रेस की ओर नजर
साल 2019 में शंकरसिंह वाघेला एनसीपी में शामिल हुए और कुछ समय तक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली। बाद में उन्होंने एनसीपी भी छोड़ दी।
इसके बाद उन्होंने अपने अलग राजनीतिक मंच पर काम शुरू किया। नवंबर 2024 में वसंत वागदो में अपने आवास पर हुई बैठक के बाद प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी शुरू की गई। बाद में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी को फिर सक्रिय किया गया।
वाघेला ने 2 अक्टूबर से राजनीतिक अभियान शुरू करने की योजना भी बताई थी। लेकिन अब कांग्रेस के साथ बातचीत की खबरों ने इस पूरे प्लान को बदलने की संभावना पैदा कर दी है।
गुजरात कांग्रेस क्यों देख रही है वाघेला के प्रभाव पर नजर?
गुजरात में आने वाले समय में स्थानीय और विधानसभा राजनीति को लेकर गतिविधियां बढ़ने वाली हैं। गांधीनगर नगर निगम चुनाव भी नजदीक हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए वाघेला का पुराना राजनीतिक नेटवर्क और गुजरात की राजनीति में उनकी पहचान चर्चा का विषय है।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा के मुताबिक, भाजपा से असंतुष्ट कुछ नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। उनका कहना है कि ऐसे नेताओं को कांग्रेस एक साझा राजनीतिक मंच उपलब्ध करा सकती है।
वाघेला लंबे समय से भाजपा, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते रहे हैं। अब अगर कांग्रेस में उनकी वापसी होती है तो उनकी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी किस तरह करती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल कांग्रेस में वापसी को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बातचीत और नेतृत्व स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। इसलिए अभी इसे वाघेला की औपचारिक कांग्रेस वापसी के बजाय संभावित वापसी की दिशा में चल रही बातचीत के तौर पर ही देखा जा रहा है।


