उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने संगठन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में पार्टी 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में दो दिवसीय चिंतन बैठक करने जा रही है। बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति और जमीनी फीडबैक पर चर्चा होगी। बूथ से लेकर मंडल और जिला स्तर तक संगठन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। पार्टी के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में ब्रज क्षेत्र में बीजेपी की सीटों का आंकड़ा पहले की तुलना में कम हुआ है।
मथुरा की बैठक से पहले 1 अक्टूबर को बीजेपी के संगठन प्रभारी विनोद तावड़े और सभी सह प्रभारी लखनऊ पहुंचेंगे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक होगी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के साथ भी संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
मथुरा में जुटेंगे बड़े नेता, संगठन की रिपोर्ट पर होगी चर्चा
3 और 4 अक्टूबर को होने वाली बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत केंद्र और प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
बैठक में केवल चुनावी रणनीति पर चर्चा तक बात सीमित रहने की संभावना नहीं है। पार्टी ब्रज क्षेत्र के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश में संगठन की स्थिति की समीक्षा करेगी। खास तौर पर कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक और जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता पर चर्चा होगी।
बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर पर संगठन कितना सक्रिय है, कार्यकर्ताओं के सामने क्या चुनौतियां हैं और चुनाव से पहले किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की जरूरत है—ये मुद्दे बैठक के केंद्र में रहने की संभावना है।
अयोध्या के बाद मथुरा पर क्यों है फोकस?
मथुरा में बैठक का आयोजन सिर्फ संगठनात्मक वजहों से नहीं देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे एक रणनीतिक पहलू भी है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद आगामी विधानसभा चुनाव ऐसा पहला चुनाव होगा, जिसमें राम मंदिर निर्माण का मुद्दा पहले जैसी स्थिति में नहीं होगा। ऐसे में बीजेपी का ध्यान अब अयोध्या से आगे मथुरा और ब्रज क्षेत्र की ओर भी केंद्रित होता दिखाई दे रहा है।
मथुरा-वृंदावन बीजेपी की राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों में पहले से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का पहला दौरा मथुरा-वृंदावन का बताया गया है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने भी पिछले साल दिसंबर में मथुरा का दौरा किया था।
कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मथुरा पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने अयोध्या और काशी की तर्ज पर मथुरा-वृंदावन के विकास और विरासत के सम्मान की बात कही थी।
ब्रज में पिछले चुनावों के आंकड़ों ने भी बढ़ाई समीक्षा की जरूरत
मथुरा बैठक के पीछे चुनावी आंकड़े भी एक अहम वजह हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ब्रज क्षेत्र की 13 में से 12 सीटें जीती थीं। 2024 में यह संख्या घटकर 8 रह गई।
विधानसभा चुनावों में भी सीटों की संख्या में कमी दर्ज हुई। 2017 में बीजेपी ने 65 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 53 रहा।
इन आंकड़ों के बीच आगामी चुनाव से पहले संगठन की स्थिति को समझना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। मथुरा की बैठक में इसी जमीनी स्थिति को लेकर कार्यकर्ताओं और संगठन से मिलने वाले फीडबैक पर चर्चा होने की संभावना है।
RSS की बैठकों से लेकर 2027 की तैयारी तक, मथुरा क्यों बना अहम केंद्र?
मथुरा में बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां पहले भी होती रही हैं। इसी साल जनवरी में आरएसएस की तीन दिवसीय बैठक भी यहां हुई थी। इस दौरान अलग-अलग कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक यानी ‘दिवाली बैठक’ भी मथुरा में हुई थी।
पार्टी के जानकारों के मुताबिक, अयोध्या से जुड़े विवादों के बाद मथुरा में बैठक का आयोजन संगठन और वैचारिक मुद्दों पर पार्टी की सक्रियता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषण है, न कि पार्टी की ओर से घोषित आधिकारिक उद्देश्य।
अब 3 और 4 अक्टूबर की बैठक में यह साफ होगा कि बीजेपी संगठन को लेकर मिले फीडबैक को किस तरह देखती है और आगामी चुनाव की तैयारियों में किन स्तरों पर बदलाव या मजबूती पर जोर दिया जाता है।
आम मतदाता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। बूथ स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक की तैयारियों का असर चुनावी मैदान में पार्टी की गतिविधियों के रूप में दिखाई देगा।

