दक्षिण-उत्तर विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं के बयानों का किया जिक्र

दक्षिण-उत्तर विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं के बयानों का किया जिक्र

भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और उसके नेताओं पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने खास तौर पर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक बहस, राहुल गांधी की संसद सदस्य के रूप में शपथ और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के पुराने बयानों का जिक्र किया।

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में ऐसे कई बयान सामने आए हैं, जिनसे देश में क्षेत्रीय और सामाजिक विभाजन की धारणा मजबूत होती है। हालांकि, जिन बयानों का उन्होंने हवाला दिया, उनमें से कुछ नेताओं ने बाद में अपनी टिप्पणियों को अलग संदर्भ में समझाया था।

राहुल गांधी की 2024 की शपथ को लेकर उठाया सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की 2014 और 2024 में सांसद पद की शपथ लेने के तरीके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 में राहुल गांधी ने भगवान के नाम पर शपथ ली थी, जबकि 2024 में उन्होंने अंग्रेजी में प्रतिज्ञान का विकल्प चुना।

हालांकि, यहां संवैधानिक प्रावधान को समझना जरूरी है। संविधान की तीसरी अनुसूची में सांसदों के लिए शपथ लेने के दो विकल्प दिए गए हैं। सदस्य या तो ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकता है या गंभीरता से प्रतिज्ञान यानी solemn affirmation कर सकता है। ऐसे में केवल प्रतिज्ञान के विकल्प का इस्तेमाल अपने आप में संवैधानिक उल्लंघन नहीं है।

राहुल गांधी ने 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में जून 2024 में शपथ ली थी।

जुबली हिल्स उपचुनाव के बयान का भी जिक्र

भाजपा प्रवक्ता ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के जुबली हिल्स विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयान का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस और मुस्लिम समुदाय के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर रेवंत रेड्डी की टिप्पणी का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

नवंबर 2025 में जुबली हिल्स उपचुनाव के प्रचार के दौरान रेवंत रेड्डी के नाम से ‘कांग्रेस मतलब मुसलमान और मुसलमान मतलब कांग्रेस’ वाली टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था। इस बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाए थे, जबकि बयान के संदर्भ और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई थीं।

उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति पर पुरानी टिप्पणियां भी चर्चा में

सुधांशु त्रिवेदी ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच करों के बंटवारे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस नेता डीके सुरेश और पी. चिदंबरम के बयानों को आधार बनाकर आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं की टिप्पणियों ने क्षेत्रीय विभाजन की बहस को बढ़ावा दिया।

फरवरी 2024 में डीके सुरेश ने दक्षिणी राज्यों से मिलने वाले कर राजस्व और केंद्र से मिलने वाले हिस्से को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर कथित असमानता जारी रही तो दक्षिण भारत में अलग देश की मांग उठ सकती है। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य कर वितरण में कथित असमानता की ओर ध्यान आकर्षित करना था।

इसी तरह, पी. चिदंबरम ने मार्च 2024 में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी पर चर्चा की थी। उन्होंने इसके पीछे भाषा, क्षेत्रीय दलों और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया था।

‘आर्य-द्रविड़’ संदर्भ को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना

त्रिवेदी ने रेवंत रेड्डी के कथित ‘आर्य और द्रविड़’ संदर्भ का भी उल्लेख किया। भाजपा नेता ने इसे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।

इस पूरी बहस में एक तरफ भाजपा कांग्रेस के नेताओं के पुराने बयानों को आधार बनाकर क्षेत्रीय और सामाजिक विभाजन का आरोप लगा रही है। दूसरी तरफ, कांग्रेस नेताओं के कुछ पुराने बयान कर-वितरण, संघीय ढांचे और क्षेत्रीय असमानता जैसे मुद्दों के संदर्भ में दिए गए थे।

ऐसे में मौजूदा विवाद सिर्फ नेताओं के बयानों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि उत्तर-दक्षिण संबंधों, कर वितरण, भाषा और केंद्र-राज्य संबंधों पर राजनीतिक बहस को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है। सुधांशु त्रिवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्हीं मुद्दों को जोड़ते हुए कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाए गए।