पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं, संस्कार और चरित्र भी जरूरी, पॉपुलर टीचर्स अवार्ड में दयाशंकर मिश्र ने बताई भारतीय शिक्षा की ताकत

पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं, संस्कार और चरित्र भी जरूरी, पॉपुलर टीचर्स अवार्ड में दयाशंकर मिश्र ने बताई भारतीय शिक्षा की ताकत

वाराणसी में आयोजित पॉपुलर टीचर्स अवार्ड-2026 समारोह में शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने आई—पढ़ाई का मकसद केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि बेहतर सोच, संस्कार और जिम्मेदार व्यक्तित्व तैयार करना भी है। होटल ताज में आयोजित कार्यक्रम में आयुष एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की जरूरत बताई। इसी कार्यक्रम में उमा इंस्टीट्यूट के एमडी राकेंदु भूषण शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना क्यों जरूरी बताया गया

आयुष एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’
आयुष एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’

मुख्य अतिथि डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि भारत के गौरव को समझने के लिए उसकी प्राचीन ज्ञान परंपरा, शिक्षा व्यवस्था और वैज्ञानिक उपलब्धियों को जानना जरूरी है। उनके मुताबिक भारतीय परंपरा में शिक्षा को केवल किताबों और विषयों तक सीमित नहीं माना गया। ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी को भी बराबर महत्व दिया गया।

उन्होंने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने भारत की शैक्षणिक परंपरा को व्यापक पहचान दिलाई। उनका कहना था कि नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

आर्यभट्ट से लेकर आधुनिक शिक्षा तक, समन्वय पर जोर

डॉ. दयाशंकर मिश्र ने भारतीय गणित और खगोल विज्ञान की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे विद्वानों के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा के अलग-अलग आयामों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास केवल बीते समय की घटनाओं का विवरण नहीं है। इतिहास से वर्तमान को समझने और भविष्य के लिए दिशा तय करने में मदद मिलती है। ऐसे में शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर तालमेल नई पीढ़ी के लिए उपयोगी हो सकता है।

राकेंदु भूषण शुक्ला को शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मान

पॉपुलर टीचर्स अवार्ड-2026 समारोह में उमा इंस्टीट्यूट के एमडी राकेंदु भूषण शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करते हुए।
पॉपुलर टीचर्स अवार्ड-2026 समारोह में उमा इंस्टीट्यूट के एमडी राकेंदु भूषण शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करते हुए।

समारोह में उमा इंस्टीट्यूट के एमडी राकेंदु भूषण शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उनके संस्थागत विकास, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने से जुड़े प्रयासों को सराहा गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद राकेंदु भूषण शुक्ला ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति की बुनियाद है। उनके मुताबिक विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के साथ उन्हें सही मार्गदर्शन और जीवन मूल्यों से जोड़ना भी शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ विद्यार्थियों में नवाचार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

शिक्षा के साथ शोध और नवाचार पर भी फोकस

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शोध को लेकर भी जोर दिया गया। डॉ. दयाशंकर मिश्र ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पढ़ाई के साथ शोध और नवाचार पर लगातार ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्थानों की पहचान मजबूत करने के लिए शिक्षा की गुणवत्ता और शोध की संस्कृति को और विकसित करना जरूरी है। साथ ही, भारत को अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ मौजूदा चुनौतियों को भी समझना होगा।

समारोह का संदेश व्यापक रूप से शिक्षा की बदलती जरूरतों से जुड़ा रहा। एक तरफ भारतीय ज्ञान परंपरा और उसकी उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बात कही गई, तो दूसरी ओर आधुनिक शिक्षा, शोध, रोजगारपरक कौशल और नवाचार की जरूरत पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और राकेंदु भूषण शुक्ला को सम्मानित किया गया।