बॉलीवुड में फिल्म की कहानी, स्टारकास्ट और बजट के साथ-साथ टाइटल को लेकर भी काफी सोच-विचार किया जाता है। कुछ निर्माता तो नाम रखने से पहले ज्योतिष और न्यूमेरोलॉजी तक का सहारा लेते हैं। लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसा टाइटल भी रहा है, जिसका रिकॉर्ड बेहद अजीब रहा। ‘कर्ज’ नाम या टाइटल में ‘कर्ज’ शब्द वाली करीब 9 फिल्मों का जिक्र मिलता है, लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट का दर्जा हासिल नहीं कर सकी। खास बात यह है कि कुछ फिल्मों में बड़े सितारे थे और कई फिल्मों के गाने बेहद लोकप्रिय हुए, फिर भी टिकट खिड़की पर कहानी कमजोर पड़ गई।
ऋषि कपूर की ‘कर्ज’ से शुरू हुई कहानी
इस कहानी की सबसे चर्चित शुरुआत 1980 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘कर्ज’ से होती है। फिल्म में ऋषि कपूर मुख्य भूमिका में थे, जबकि सिमी गरेवाल और टीना अंबानी अहम भूमिकाओं में नजर आई थीं।
फिल्म की कहानी और खासकर इसके संगीत को काफी पसंद किया गया। ‘ओम शांति ओम’ और ‘एक हसीना थी’ जैसे गाने आज भी याद किए जाते हैं। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसे बिलो एवरेज और व्यावसायिक तौर पर असफल फिल्म माना गया।
समय के साथ इस फिल्म की प्रतिष्ठा जरूर बदली। आज इसे हिंदी सिनेमा की चर्चित कल्ट फिल्मों में गिना जाता है। यानी बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में फिल्म की कहानी और संगीत ने इसे अलग पहचान दिलाई।
फिल्म की असफलता से ऋषि कपूर हुए थे आहत
‘कर्ज’ की असफलता का असर ऋषि कपूर पर भी पड़ा था। उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में फिल्म के खराब प्रदर्शन से मिली निराशा का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस असफलता के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान हुए थे और डिप्रेशन में चले गए थे।
कई साल बाद इसी नाम से एक और बड़ी कोशिश हुई। हिमेश रेशमिया ने ‘कर्ज्ज्ज्ज’ नाम से फिल्म बनाई और पुरानी फिल्म के कुछ लोकप्रिय गानों को नए अंदाज में पेश किया। संगीत को कुछ हद तक प्रतिक्रिया मिली, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, करीब 24 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फिल्म ने लगभग 16 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
बड़े सितारे आए, लेकिन ‘कर्ज’ का रिकॉर्ड नहीं बदला
इसके बाद ‘कर्ज’ शब्द वाले कई और प्रोजेक्ट सामने आए। ‘कर्ज: द बर्डन ऑफ ट्रुथ’ में सनी देओल, सुनील शेट्टी और शिल्पा शेट्टी जैसे कलाकार थे। करीब 11 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले फिल्म ने लगभग 15 करोड़ रुपये कमाए और इसे औसत प्रदर्शन वाली फिल्म माना गया।
इसी तरह ‘कर्ज तेरे खून का’ नाम की टीवी फिल्म भी आई, जिसमें भारत भूषण मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म भी सफल नहीं हो सकी।
1990 में जैकी श्रॉफ और नीलम की ‘दूध का कर्ज’ रिलीज हुई। करीब 2.5 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 3 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसका प्रदर्शन बिलो एवरेज रहा। बाद में 2016 में इसी नाम से एक लो-बजट फिल्म और बनी, लेकिन वह भी बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।
मल्टीस्टारर भी नहीं बचा पाईं ‘कर्ज’ की किस्मत
1990 में ही ‘प्यार का कर्ज’ नाम से एक मल्टीस्टारर फिल्म रिलीज हुई। इसमें मिथुन चक्रवर्ती, धर्मेंद्र, विनोद मेहरा, कादर खान, मीनाक्षी शेषाद्री, नीलम, शक्ति कपूर और असरानी जैसे कई बड़े कलाकार थे। इतनी बड़ी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर केवल औसत प्रदर्शन कर सकी।
इसके अगले साल यानी 1991 में ‘कर्ज चुकाना है’ रिलीज हुई। इसमें गोविंदा, राज किरण, नीलम और कादर खान जैसे कलाकार थे। लेकिन यह फिल्म भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी और फ्लॉप साबित हुई।
शाहरुख खान से जुड़ी ‘महान कर्ज’ नाम की शॉर्ट फिल्म का भी जिक्र मिलता है, लेकिन वह भी बॉक्स ऑफिस पर कोई खास असर नहीं छोड़ सकी।
इस तरह ‘कर्ज’ शब्द वाली फिल्मों का रिकॉर्ड एक अजीब संयोग की तरफ इशारा करता है। किसी फिल्म के सफल या असफल होने के पीछे टाइटल अकेला कारण नहीं होता। कहानी, निर्देशन, रिलीज, दर्शकों की पसंद और बॉक्स ऑफिस परिस्थितियां कई चीजों पर निर्भर करती हैं। फिर भी, जब एक ही टाइटल या शब्द से जुड़ी इतनी फिल्में लगातार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करें, तो बॉलीवुड में उसके बारे में किस्से बनना स्वाभाविक है।
और शायद यही वजह है कि हाल के वर्षों में फिल्म निर्माता ‘कर्ज’ शब्द को टाइटल में इस्तेमाल करने से बचते नजर आते हैं। बॉलीवुड में इसे महज संयोग माना जाए या एक अजीब बॉक्स ऑफिस पैटर्न, लेकिन ‘कर्ज’ का यह इतिहास निश्चित तौर पर दिलचस्प है।
