Education-Employment Report: यूपी के 33 जिले शिक्षा और रोजगार में पिछड़े, चंडीगढ़ सबसे आगे, देखें पूरी लिस्ट

Education-Employment Report: यूपी के 33 जिले शिक्षा और रोजगार में पिछड़े, चंडीगढ़ सबसे आगे, देखें पूरी लिस्ट

उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार से जुड़ी एक रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने रखती है। Future of India Foundation की YouthPower Report के मुताबिक, देश के 800 जिलों में किए गए सर्वे में यूपी के 33 जिलों को शिक्षा, स्किल और रोजगार के लिहाज से पिछड़ी श्रेणी में रखा गया है। यह संख्या किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा है। वहीं राष्ट्रीय स्कोरिंग में 66 अंकों के साथ चंडीगढ़ सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों और जिलों की स्थिति को युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों और उनकी रोजगार तैयारी के आधार पर परखा गया है।

रिपोर्ट का फोकस सिर्फ स्कूल-कॉलेज की संख्या पर नहीं है। इसमें यह देखने की कोशिश की गई है कि किसी जिले में युवा शिक्षा हासिल करने के बाद रोजगार के लिए कितने तैयार हैं और उन्हें आगे बढ़ने के कितने अवसर मिल रहे हैं।

800 जिलों का सर्वे, 160 को माना गया पिछड़ा

Future of India Foundation ने देश के कुल 800 जिलों को इस अध्ययन में शामिल किया। इनमें से 160 जिलों को शिक्षा, कौशल और रोजगार के लिहाज से पिछड़ी श्रेणी में रखा गया।

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में ऐसे जिलों की संख्या 33 है। इसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश के 24-24 जिले इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं। छत्तीसगढ़ के 11, ओडिशा के 10 और असम के 9 जिले भी सूची में हैं।

झारखंड और महाराष्ट्र के 7-7 जिले, राजस्थान के 4, गुजरात के 3 और तेलंगाना तथा कर्नाटक के 2-2 जिले इस श्रेणी में रखे गए हैं। आंध्र प्रदेश और हरियाणा का एक-एक जिला पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है।

यानी रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल यूपी के सामने खड़ा होता है, जहां 33 जिले इस श्रेणी में आए हैं।

चंडीगढ़ टॉप पर, कई राज्यों में एक भी पिछड़ा जिला नहीं

राष्ट्रीय स्तर की स्कोरिंग में चंडीगढ़ 66 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा, कौशल और रोजगार के लिहाज से जयपुर की स्थिति भी बेहतर बताई गई है। हालांकि राजस्थान की राष्ट्रीय स्कोरिंग 45.7 अंक रही और राज्य को 25वां स्थान मिला।

दूसरी तरफ कुछ राज्यों के लिए तस्वीर काफी बेहतर बताई गई है। पंजाब, केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड और गोवा के किसी भी जिले को 160 पिछड़े जिलों की सूची में शामिल नहीं किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा और आंध्र प्रदेश की स्थिति भी अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर रही। हालांकि इन दोनों राज्यों का एक-एक जिला पिछड़ी श्रेणी में रखा गया है।

इस तुलना से यह साफ होता है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों की स्थिति देश के अलग-अलग हिस्सों में काफी असमान है।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, युवाओं के अवसर और तैयारी भी जांची गई

YouthPower Report की खास बात यह है कि इसमें किसी जिले को सिर्फ शिक्षा व्यवस्था के आधार पर नहीं आंका गया। रिपोर्ट के लिए पांच अलग-अलग मानकों का इस्तेमाल किया गया।

पहला मानक Education है। इसमें जिले में शिक्षा से जुड़ा बुनियादी ढांचा और व्यवस्था देखी गई।

दूसरा मानक Opportunity है। इसमें यह आकलन किया गया कि युवाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के कितने अवसर मौजूद हैं।

तीसरा पैमाना Participation है। इसके जरिए युवाओं की भागीदारी को समझने की कोशिश की गई।

चौथा मानक Readiness है। इसमें यह देखा गया कि युवा रोजगार और भविष्य की जरूरतों के लिए कितने तैयार हैं।

पांचवां और अंतिम मानक Work है। यानी युवाओं को वास्तविक काम और रोजगार से जोड़ने की स्थिति कैसी है।

इस तरह रिपोर्ट शिक्षा से लेकर नौकरी तक की पूरी प्रक्रिया को एक साथ देखने की कोशिश करती है।

यूपी के 33 जिलों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है और यहां बड़ी संख्या में युवा आबादी है। ऐसे में 33 जिलों का पिछड़ी श्रेणी में आना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। इसका सीधा संबंध उन युवाओं से है, जो बेहतर शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 160 पिछड़े जिलों में यूपी के 33 जिले शामिल हैं। इसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश के 24-24 जिले हैं। इससे राज्यों के बीच शिक्षा और रोजगार की तैयारी में मौजूद अंतर भी सामने आता है।

हालांकि यह रिपोर्ट अपने निर्धारित पांच मानकों पर आधारित है और इसे उसी संदर्भ में देखना चाहिए। इसका उद्देश्य यह बताना है कि किन इलाकों में युवाओं के लिए शिक्षा, अवसर, भागीदारी, रोजगार की तैयारी और काम से जुड़े संकेतकों में सुधार की जरूरत अधिक दिखाई देती है।

युवाओं के लिए इसका सबसे बड़ा मतलब यही है कि सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के साथ कौशल, रोजगार के अवसर और काम के लिए तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। रिपोर्ट ने इसी पूरी तस्वीर को जिलावार स्तर पर सामने रखने की कोशिश की है।