तमिलनाडु में विकास परियोजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चेन्नई से बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती रही हैं, लेकिन तमिलनाडु के विकास के प्रति उनका संकल्प नहीं बदला। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान करीब ₹13,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से शहरों में सफर आसान होगा, उद्योगों और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस कार्यक्रम में मेट्रो कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों के विकास पर खास जोर रहा। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण समेत कई दूसरी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग उठाई।
₹13,000 करोड़ की परियोजनाओं से तमिलनाडु को क्या मिलेगा?
चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ उद्योग और व्यापार को भी मजबूती देने पर काम कर रही है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल नई सुविधाएं शुरू करना नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना भी है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से लोगों का आने-जाने का समय कम हो सकता है। वहीं, औद्योगिक और कारोबारी ढांचे के मजबूत होने से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना रहती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ परियोजनाएं पहले से पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ नई योजनाओं की नींव रखी जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन पहलों का फायदा तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों को मिलेगा।
हालांकि, परियोजनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उनका काम कितनी तेजी से पूरा होता है और सुविधाएं आम लोगों तक कब पहुंचती हैं।
‘विरासत से प्रेरणा, विज्ञान से प्रगति’, नवरात्रि पर PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत तमिलनाडु की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर तमिलनाडु की धरती पर आना उनके लिए विशेष है। कार्यक्रम से पहले उन्हें जलकंडेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और आशीर्वाद लेने का अवसर मिला।
उन्होंने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक विरासत, वैज्ञानिक प्रगति और आधुनिक बुनियादी ढांचे के मेल में है।
मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उन्हें पहले मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के तौर पर जनता की सेवा करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि इन वर्षों में लोकतंत्र की दो बड़ी ताकतों—देश की जनता और सहकारी संघवाद—पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। उनके मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग से विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
2014 में 5 शहरों तक सीमित थी मेट्रो, अब 25 शहरों में सेवा
प्रधानमंत्री ने शहरी विकास और सार्वजनिक परिवहन को अपनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि शहरों की समस्याओं को केवल सड़कें चौड़ी करके हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए मेट्रो, सड़क, कनेक्टिविटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को साथ लेकर चलना जरूरी है।
मोदी के अनुसार, 2014 में देश के पांच शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध थीं, जबकि अब 25 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से लोगों की यात्रा आसान होती है और शहरों के विकास को गति मिलती है।
प्रधानमंत्री ने विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में भारत की प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत मोबाइल फोन निर्माण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है। उनके मुताबिक, 2014 के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना और रक्षा निर्यात में 50 गुना वृद्धि हुई है। इंजीनियरिंग निर्यात में भी नया रिकॉर्ड बना है।
मोदी ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ोतरी से युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
₹17,000 करोड़ के पोर्ट प्रोजेक्ट से लेकर मेट्रो विस्तार तक, CM विजय ने रखीं मांगें
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार करीब ₹17,000 करोड़ के निवेश से थूथुकुडी स्थित वीओ चिदंबरनार पोर्ट को विश्वस्तरीय मेगा कंटेनर और ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित कर रही है।
इस परियोजना का उद्देश्य बंदरगाह की क्षमता बढ़ाना और समुद्री व्यापार के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना है। बेहतर पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से माल की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिल सकती है।
इसी कार्यक्रम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य की परिवहन जरूरतों को लेकर कई मांगें रखीं। उन्होंने प्रधानमंत्री से चेन्नई मेट्रो रेल के तीसरे चरण को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। इस विस्तार से एयरपोर्ट-किलांबक्कम और पूनामल्ली-सुंगुवरचत्रम जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर करने का प्रस्ताव है।
विजय ने कर्नाटक के बोम्मासंद्रा से होसुर को जोड़ने वाली अंतरराज्यीय मेट्रो लाइन का प्रस्ताव भी रखा। इसके अलावा, उन्होंने कोयंबटूर और मदुरै की मेट्रो रेल परियोजनाओं पर दोबारा विचार करने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने 2026 के केंद्रीय बजट में घोषित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का स्वागत करते हुए चेन्नई-कन्याकुमारी और चेन्नई-कोयंबटूर के बीच नए कॉरिडोर बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को छह लेन का बनाने समेत कई सड़क परियोजनाओं को भी प्राथमिकता देने की मांग की।
कुल मिलाकर, चेन्नई का यह कार्यक्रम तमिलनाडु में परिवहन, उद्योग और व्यापार से जुड़ी योजनाओं पर केंद्रित रहा। अब इन परियोजनाओं के साथ मुख्यमंत्री की ओर से रखी गई मांगों पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर नजर रहेगी। आम लोगों के लिए सबसे अहम बात यही होगी कि इन योजनाओं से यात्रा, रोजगार और कारोबार के क्षेत्र में जमीन पर कितनी जल्दी बदलाव दिखाई देता है।



