क्रिकेट के दो दिग्गजों राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग के बेटों के बीच मैदान पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। वीनू मांकड़ ट्रॉफी के अंडर-19 एलीट ग्रुप में कर्नाटक और दिल्ली की टीमें आमने-सामने थीं। इस मैच में राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय द्रविड़ ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींचा, जबकि वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग की कप्तानी वाली दिल्ली टीम को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। अन्वय ने महज 41 गेंदों में नाबाद 85 रन बनाए। उनकी पारी और कर्नाटक के दूसरे बल्लेबाजों के शतकों की मदद से टीम ने 418 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में दिल्ली की टीम 220 रन पर सिमट गई और मुकाबला 198 रन से हार गई।
द्रविड़ के बेटे ने बदला खेल का अंदाज, 41 गेंदों में मचाया धमाल
12 अक्टूबर को खेले गए इस मुकाबले में अन्वय द्रविड़ कर्नाटक अंडर-19 टीम का हिस्सा थे। दूसरी ओर, आर्यवीर सहवाग दिल्ली की टीम की कप्तानी कर रहे थे। दोनों खिलाड़ियों के पिता भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम रहे हैं, लेकिन इस मैच में चर्चा उनके बेटों के प्रदर्शन की रही।
राहुल द्रविड़ अपने संयमित और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाजी अंदाज के लिए पहचाने जाते थे। वहीं, वीरेंद्र सहवाग की पहचान तेज गति से रन बनाने और गेंदबाजों पर दबाव बनाने की रही। हालांकि, इस मुकाबले में उनके बेटों का खेल इस पारंपरिक छवि से अलग नजर आया।
अन्वय ने क्रीज पर उतरते ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने सिर्फ 41 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 85 रन बना दिए। उनकी पारी में 7 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। यानी उन्होंने अपनी पारी में 50 रन केवल बाउंड्री के जरिए बनाए।
अन्वय की बल्लेबाजी की रफ्तार ने कर्नाटक को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पारी के अंत तक अपना विकेट नहीं गंवाया और 207 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए।
कर्नाटक ने 418 रन ठोके, दो बल्लेबाजों ने भी जड़े शतक
कर्नाटक ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 418 रन बनाए। टीम के इस बड़े स्कोर में अन्वय के अलावा नितिन आर्या और ध्रुव कृष्णन का भी अहम योगदान रहा। दोनों बल्लेबाजों ने अपने-अपने शतक पूरे किए।
एक तरफ जहां दोनों बल्लेबाजों ने लंबी पारियां खेलीं, वहीं अन्वय ने तेजी से रन बनाकर स्कोरबोर्ड की रफ्तार बढ़ाई। तीनों के प्रदर्शन ने दिल्ली के सामने बड़ा लक्ष्य खड़ा कर दिया।
अन्वय की पारी का एक दिलचस्प आंकड़ा छक्कों से जुड़ा रहा। कर्नाटक की ओर से पूरी पारी में कुल 22 छक्के लगाए गए। इनमें से अकेले 5 छक्के अन्वय के बल्ले से निकले।
इस तरह कर्नाटक ने दिल्ली के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। 419 रन का लक्ष्य हासिल करने के लिए दिल्ली को न सिर्फ मजबूत शुरुआत की जरूरत थी, बल्कि बल्लेबाजों को लंबी पारियां भी खेलनी थीं।
आर्यवीर सहवाग 35 गेंदों में 32 रन ही बना सके
इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की शुरुआत आर्यवीर सहवाग ने की। कप्तान से टीम को तेज शुरुआत दिलाने की उम्मीद थी, लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे।
आर्यवीर ने 35 गेंदों पर 32 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके शामिल रहे, लेकिन वह एक भी छक्का नहीं लगा सके। कर्नाटक के मुकाबले दिल्ली की बल्लेबाजी में बड़े शॉट्स की कमी साफ नजर आई।
दिल्ली की पूरी टीम मिलकर सिर्फ 5 छक्के लगा सकी। दिलचस्प बात यह रही कि इतने छक्के अकेले अन्वय द्रविड़ ने कर्नाटक की पारी में लगाए थे।
हालांकि, किसी बल्लेबाज के प्रदर्शन का आकलन केवल छक्कों की संख्या से नहीं किया जा सकता। फिर भी इस मुकाबले में दोनों टीमों के आक्रामक शॉट्स और रन बनाने की गति के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। कर्नाटक ने जहां शुरुआत से ही बड़े स्कोर की नींव रखी, वहीं दिल्ली की टीम लक्ष्य का दबाव झेल नहीं पाई।
198 रन से हारी दिल्ली, अन्वय की पारी बनी चर्चा का केंद्र
कर्नाटक के 419 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की पूरी टीम 41.1 ओवर में 220 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। इस तरह कर्नाटक ने 198 रन के बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
मैच में कर्नाटक की बल्लेबाजी और दिल्ली की लक्ष्य का पीछा करने की क्षमता के बीच बड़ा अंतर रहा। अन्वय द्रविड़ की तेजतर्रार पारी ने जहां कर्नाटक को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, वहीं दिल्ली के बल्लेबाज लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुंच सके।
यह मुकाबला युवा क्रिकेटरों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अहम मंच भी रहा। अन्वय की 41 गेंदों में 85 रन की पारी ने दिखाया कि युवा स्तर पर बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की क्षमता के साथ टीम के बड़े स्कोर में योगदान दे सकते हैं।
हालांकि, एक मैच के प्रदर्शन से किसी खिलाड़ी के भविष्य का आकलन करना जल्दबाजी होगी। अन्वय और आर्यवीर दोनों के लिए आगे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल, वीनू मांकड़ ट्रॉफी के इस मुकाबले में अन्वय की विस्फोटक बल्लेबाजी और कर्नाटक की 198 रन की जीत सबसे बड़ी चर्चा बन गई है।



