भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध मौत के मामले में उनकी मां मधु दुबे को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की CBI जांच कराने या दोबारा जांच के निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। आकांक्षा की मां लगातार दावा करती रही हैं कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या थी और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अब याचिकाकर्ता के वकील ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। करीब साढ़े तीन साल से न्याय की उम्मीद लगाए परिवार के लिए यह फैसला मामले में आगे की कानूनी लड़ाई का नया मोड़ है।
आकांक्षा दुबे केस में हाईकोर्ट का फैसला, CBI जांच की मांग खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। आकांक्षा की मां मधु दुबे ने अदालत से मांग की थी कि बेटी की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए जाएं।
परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए थे। मधु दुबे का आरोप है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या हुई थी। इसी आधार पर उन्होंने मामले की जांच में गंभीरता बरतने और सच्चाई सामने लाने की मांग की थी।
हालांकि, अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच और उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड से जुड़े पहलुओं पर विचार किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शव उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मौत के तरीके और कारणों की दोबारा जांच करना संभव नहीं है।
इस फैसले के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। याचिकाकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।
फॉरेंसिक साक्ष्यों का हवाला देकर उठाए गए सवाल, कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने फॉरेंसिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि मृतका के निजी अंग से जुड़े कुछ साक्ष्यों की जांच में आरोपी से मिलान होने का दावा किया गया था। याचिकाकर्ता पक्ष ने इन तथ्यों को आधार बनाते हुए मामले को आत्महत्या के बजाय हत्या के रूप में देखने और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत 3 जून 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। यह धारा आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से यह भी पूछा कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए दोबारा चिकित्सकीय परीक्षण कराने के लिए कोई आपत्ति दाखिल की गई थी। इस पर अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि ऐसी कोई आपत्ति दाखिल नहीं की गई थी।
अदालत ने आरोपपत्र और उपलब्ध रिकॉर्ड के संदर्भ में याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट के आदेश के अनुसार, मामले में दाखिल आरोपपत्र को चुनौती देने वाली आपत्ति नहीं होने और शव उपलब्ध नहीं होने की परिस्थितियों में दोबारा जांच की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि फॉरेंसिक साक्ष्यों को लेकर जो दावे किए गए, वे याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलें हैं। उन्हें अदालत द्वारा हत्या साबित किए जाने के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
26 मार्च 2023 को होटल के कमरे में मिला था अभिनेत्री का शव
आकांक्षा दुबे की मौत ने भोजपुरी मनोरंजन जगत में व्यापक चर्चा पैदा की थी। 26 मार्च 2023 को उनका शव वाराणसी के सारनाथ इलाके स्थित एक होटल के कमरे में मिला था। इसके बाद मामले में पुलिस जांच शुरू हुई और 27 मार्च 2023 को सारनाथ थाने में FIR दर्ज की गई।
मौत की परिस्थितियों को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे। आकांक्षा की मां मधु दुबे ने जांच पर असंतोष जताते हुए बेटी की मौत को हत्या बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखी।
परिवार के लिए यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि बेटी की मौत से जुड़े सवालों का जवाब पाने की लड़ाई भी है। दूसरी ओर, अदालत के सामने किसी मामले की दोबारा जांच कराने की मांग पर फैसला उपलब्ध साक्ष्यों, जांच रिकॉर्ड और कानूनी आधार को ध्यान में रखकर किया जाता है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने CBI जांच की मांग स्वीकार नहीं की है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने अपने आदेश में हत्या के आरोप को सही ठहराया है। अदालत का फैसला याचिका में उठाई गई मांग और उसके सामने रखे गए कानूनी पहलुओं से संबंधित है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी, आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने कहा है कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि याचिकाकर्ता सर्वोच्च अदालत में क्या आधार रखते हैं और वहां से क्या आदेश आता है।
फिलहाल, CBI जांच या नए सिरे से जांच कराने की मांग पर हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। परिवार की ओर से उठाए गए सवालों पर आगे कोई न्यायिक विचार होता है या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट में संभावित कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगा।
मामले से जुड़ी मुख्य जानकारी
- मृतका: भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे
- शव मिलने की तारीख: 26 मार्च 2023
- FIR: 27 मार्च 2023, सारनाथ थाना, वाराणसी
- आरोपपत्र: 3 जून 2023 को IPC की धारा 306 के तहत दाखिल
- हाईकोर्ट का फैसला: CBI जांच और दोबारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज
- आगे की कार्रवाई: याचिकाकर्ता पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
आकांक्षा दुबे की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने पर क्या रुख सामने आता है और परिवार की कानूनी लड़ाई आगे किस दिशा में बढ़ती है।



