खाटू श्याम बाबा की माता मौरवी के नाम बनेगा 500 करोड़ का भव्य शक्तिपीठ, 120 फीट ऊंचा होगा शिखर, नवंबर में भूमि पूजन

खाटू श्याम बाबा की माता मौरवी के नाम बनेगा 500 करोड़ का भव्य शक्तिपीठ, 120 फीट ऊंचा होगा शिखर, नवंबर में भूमि पूजन

राजस्थान के सीकर में बाबा खाटू श्याम के भक्तों के लिए एक बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट की तैयारी है। जिले के पिपराली क्षेत्र के लखीपुरा में उनकी माता मौरवी के नाम पर भव्य शक्तिपीठ बनाया जाएगा। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 120 फीट ऊंचा मुख्य शिखर होगा। प्रस्तावित मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां माता मौरवी के साथ उनके पुत्र बर्बरीक यानी खाटू श्याम बाबा का शीश दान से पहले का पूर्ण देह स्वरूप स्थापित करने की योजना है। नवंबर 2026 में भूमि पूजन प्रस्तावित है। मंदिर के साथ डिजिटल गैलरी, वैदिक संस्कार शाला और औषधीय उद्यान जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इस परियोजना से धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

500 करोड़ की लागत, 120 फीट ऊंचा शिखर; ऐसा होगा मंदिर

खाटू श्याम बाबा का दरबार देशभर के श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। अब सीकर जिले में माता मौरवी के लिए प्रस्तावित शक्तिपीठ इस धार्मिक पहचान को एक नया विस्तार देने की तैयारी में है।

जानकारी के मुताबिक, लखीपुरा में लगभग दो हेक्टेयर जमीन पर इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 120 फीट रखने की योजना है। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इस परियोजना का नेतृत्व सनातन धर्म रक्षा अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर और प्रस्तावित माता मौरवी शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर डॉ. दीनदयाल करेंगे। मंदिर के लिए ब्रह्मलीन संत श्रीचंद महाराज की ओर से जमीन दान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

मंदिर निर्माण की तैयारियों के तहत जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में माता मौरवी की अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई है। योजना के अनुसार, मंदिर निर्माण पूरा होने और प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद इस ज्योति को लखीपुरा स्थित शक्तिपीठ में स्थापित किया जाएगा।

माता मौरवी के साथ दिखेगा बर्बरीक का पूरा स्वरूप, क्या होगी खासियत?

प्रस्तावित शक्तिपीठ की सबसे बड़ी विशेषता माता मौरवी और उनके पुत्र बर्बरीक के संबंधों को केंद्र में रखना है। खाटू श्याम बाबा के वर्तमान प्रसिद्ध मंदिर में उनके शीश स्वरूप की पूजा होती है। वहीं, लखीपुरा के इस शक्तिपीठ में माता मौरवी के साथ बर्बरीक के लगभग 14 वर्ष की आयु वाले पूर्ण देह स्वरूप को स्थापित करने की योजना बताई गई है।

इसका उद्देश्य माता-पुत्र के संबंधों, संस्कारों और बर्बरीक की शौर्य गाथा को श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत करना है। परियोजना से जुड़ी जानकारी में इसे अपनी तरह की विशेष धार्मिक पहल बताया जा रहा है।

महाभारत से जुड़ी प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, बर्बरीक को उनकी माता मौरवी ने युद्ध में उस पक्ष का साथ देने का वचन दिलाया था, जो कमजोर पड़ रहा हो। इसी प्रतिज्ञा के कारण बर्बरीक की कथा में ‘हारे का सहारा’ बनने का भाव जुड़ा है। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे शीश दान मांगा था। धार्मिक परंपरा में इसी कथा को खाटू श्याम बाबा की महिमा से जोड़ा जाता है।

प्रस्तावित मंदिर में इसी कथा के उस हिस्से को प्रमुखता देने की योजना है, जो बर्बरीक के शीश दान से पहले उनके जीवन और माता मौरवी के साथ संबंधों को सामने लाता है।

डिजिटल गैलरी से वैदिक संस्कार शाला तक, मंदिर परिसर में होंगी कई सुविधाएं

यह परियोजना केवल पूजा-अर्चना के लिए मंदिर बनाने तक सीमित नहीं रखी गई है। योजना में आधुनिक डिजिटल गैलरी, वैदिक संस्कार शाला, औषधीय उद्यान और चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी जगह बनाने की बात कही गई है।

डिजिटल गैलरी के जरिए धार्मिक कथाओं और परंपराओं को आधुनिक माध्यमों से श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की योजना है। वहीं, वैदिक संस्कार शाला में धार्मिक संस्कारों और परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों को स्थान मिल सकता है। औषधीय उद्यान भी परिसर का हिस्सा होगा।

परियोजना से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसकी तैयारियों में भारत के 18 राज्यों और अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर सहित 10 देशों के 111 शहरों के प्रतिनिधि जुड़े हैं। यह भागीदारी परियोजना के व्यापक नेटवर्क की ओर संकेत करती है।

हालांकि, इन सुविधाओं के निर्माण, संचालन और आम लोगों के लिए उपलब्धता से जुड़ी विस्तृत जानकारी आगे की आधिकारिक घोषणाओं से स्पष्ट होगी।

धार्मिक पर्यटन बढ़ने की उम्मीद, स्थानीय कारोबार को मिल सकता है फायदा

सीकर और शेखावाटी क्षेत्र पहले से ही धार्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है। खाटू श्याम धाम के साथ सालासर और जीणमाता जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

प्रस्तावित माता मौरवी शक्तिपीठ को खाटूधाम-सालासर-जीणमाता धार्मिक क्षेत्र से जोड़कर विकसित करने की योजना है। परियोजना से जुड़े लोगों का अनुमान है कि इससे शेखावाटी में धार्मिक पर्यटन करीब 40 फीसदी तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह अभी एक अनुमान है, वास्तविक वृद्धि का आकलन मंदिर शुरू होने और पर्यटकों की संख्या के आंकड़े सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से स्थानीय होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को लाभ मिलने की संभावना है। धार्मिक स्थलों के आसपास फूल-प्रसाद की दुकानों, भोजनालयों, आवास और स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है।

फिलहाल, नवंबर में प्रस्तावित भूमि पूजन के बाद निर्माण कार्य की दिशा स्पष्ट होगी। 500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और बड़े धार्मिक परिसर की योजना के चलते यह प्रोजेक्ट सीकर के धार्मिक पर्यटन परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।