विदेश में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को साइबर अपराध के जाल में फंसाने वाले नेटवर्क के खिलाफ अब कई देश मिलकर कार्रवाई करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में BIMSTEC देशों ने सीमा पार साइबर अपराध, मानव तस्करी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। योजना के तहत खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त जांच, साझा डेटाबेस और त्वरित कार्रवाई के लिए समन्वय व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद उन विदेशी ठिकानों तक पहुंचना है, जहां भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर बंधक बनाकर ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है।
अमित शाह की बैठक में क्या तय हुआ? अब दूसरे देशों के साथ मिलकर होगी कार्रवाई
13 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में BIMSTEC देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक हुई। इसमें सदस्य देशों ने सीमा पार अपराध, मानव तस्करी और साइबर अपराध से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक के बाद दिल्ली घोषणा-पत्र भी अपनाया गया।
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय उन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करना है, जो भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी के काम में धकेलते हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भारत और संबंधित देशों की एजेंसियां खुफिया जानकारी साझा करेंगी। इसके अलावा, ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने और पीड़ितों की पहचान करने के लिए साझा कंट्रोल रूम तथा समन्वय व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
यह सहयोग इसलिए भी अहम है, क्योंकि ऐसे अपराधों में पीड़ित को एक देश से दूसरे देश ले जाया जा सकता है, जबकि धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति किसी तीसरे देश में बैठा होता है। ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी हो जाता है।
नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एजेंटों पर भी नजर
सरकार की रणनीति केवल विदेशों में मौजूद साइबर ठगी के ठिकानों तक सीमित नहीं है। भारत में बैठे उन एजेंटों और गिरोहों पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जो युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ऐसे नेटवर्क तक पहुंचाते हैं।
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु की पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीमें संबंधित देशों का दौरा कर सकती हैं। इन टीमों का उद्देश्य स्थानीय एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करना और अपराधियों के नेटवर्क को समझना होगा। इसमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) जैसी एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसके साथ ही विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों और वहां गिरफ्तार किए गए आरोपियों से संबंधित जानकारी का केंद्रीय डेटाबेस तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पीड़ितों की पहचान, उनकी स्थिति का पता लगाने और बचाव अभियान में मदद मिल सकती है।
खबर के मुताबिक, युवाओं को झूठे रोजगार प्रस्ताव देकर विदेश भेजने वाले एजेंटों के खिलाफ CBI और NIA भी सक्रिय हैं। ऐसे मामलों में आरोपियों के पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
हजारों भारतीयों को निकाला गया, फिर भी चुनौती बड़ी
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले साल तक कंबोडिया से 2,265, लाओस से 2,290 और म्यांमार से 2,165 भारतीय नागरिकों को बचाकर निकालने की कार्रवाई की गई थी। ये आंकड़े बताते हैं कि विदेश में नौकरी के नाम पर लोगों को फंसाने का मामला कितना गंभीर हो सकता है।
हालांकि, केवल लोगों को सुरक्षित निकालना ही पर्याप्त नहीं है। ऐसे नेटवर्क को चलाने वाले गिरोहों, उनके स्थानीय संपर्कों और भारत में युवाओं की भर्ती करने वाले एजेंटों पर कार्रवाई भी जरूरी है। BIMSTEC देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का उद्देश्य इसी पूरी श्रृंखला पर शिकंजा कसना है।
सरकार को उम्मीद है कि बेहतर समन्वय से साइबर ठगी के नेटवर्क की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई तेज होगी। इससे डिजिटल अरेस्ट और दूसरे वित्तीय साइबर फ्रॉड जैसे मामलों से निपटने में भी मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, इन अपराधों को रोकने में इस पहल का वास्तविक असर संयुक्त कार्रवाई और उसके परिणामों से ही स्पष्ट होगा।
साइबर स्लेवरी क्या है? नौकरी का ऑफर कैसे बन जाता है जाल
साइबर स्लेवरी का मतलब ऐसी स्थिति से है, जिसमें लोगों को धोखे से विदेश ले जाकर उनकी इच्छा के खिलाफ साइबर अपराध या ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है।
अक्सर शुरुआत एक आकर्षक नौकरी के विज्ञापन या एजेंट के प्रस्ताव से होती है। युवाओं को अच्छी सैलरी, विदेश में काम और बेहतर भविष्य का भरोसा दिया जाता है। लेकिन गंतव्य पर पहुंचने के बाद कुछ पीड़ितों के पासपोर्ट और दूसरे दस्तावेज छीन लिए जाते हैं। उन्हें धमकी, हिंसा या प्रताड़ना के डर से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जाता है।
इसका सबसे बड़ा जोखिम उन युवाओं को है, जो रोजगार की तलाश में विदेश जाना चाहते हैं और बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के एजेंटों पर भरोसा कर लेते हैं।
ऐसे में किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले कंपनी, रोजगार अनुबंध और भर्ती एजेंट की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। यदि नौकरी के नाम पर संदिग्ध भुगतान, दस्तावेज जमा करने या जल्द विदेश पहुंचने का दबाव बनाया जा रहा है, तो सावधानी बरतनी चाहिए।
BIMSTEC देशों की यह पहल सीमा पार साइबर अपराध और मानव तस्करी के खिलाफ सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि साझा जानकारी, संयुक्त जांच और बचाव अभियानों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।



