Asian Para Games 2026: शीतल देवी ने 149 अंक के साथ तोड़ा 7 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड, बिना हाथों के धनुष चलाकर रचा इतिहास

Asian Para Games 2026: शीतल देवी ने 149 अंक के साथ तोड़ा 7 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड, बिना हाथों के धनुष चलाकर रचा इतिहास

भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जम्मू-कश्मीर की 19 वर्षीय शीतल ने महिला कंपाउंड एलिमिनेशन राउंड में 149 अंक हासिल कर सात साल पुराने विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने यह उपलब्धि प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में चान यूएन के खिलाफ हासिल की। खास बात यह है कि शीतल जन्म से ही बिना हाथों के हैं और अपने पैरों, कंधे तथा जबड़े की मदद से धनुष चलाती हैं। उनका यह प्रदर्शन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरा तीरंदाजी में भारत की मजबूत मौजूदगी को भी दिखाता है।

149 अंक के साथ शीतल देवी ने कैसे तोड़ा विश्व रिकॉर्ड?

एशियाई पैरा गेम्स 2026 के महिला कंपाउंड एलिमिनेशन राउंड में शीतल देवी ने 149 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने सात साल पुराने 148 अंकों के विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड जेसिका स्ट्रैटन के नाम था।

शीतल ने चान यूएन के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में यह स्कोर बनाया। तीरंदाजी जैसे खेल में जहां निशाने की सटीकता और दबाव के बीच एकाग्रता बेहद अहम होती है, वहां लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करना बड़ी चुनौती है। शीतल ने अपने निशानों से साबित किया कि वह दुनिया की शीर्ष पैरा तीरंदाजों में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं।

इससे एक दिन पहले ही उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी। यानी शीतल का प्रदर्शन किसी एक मुकाबले तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रतियोगिता की शुरुआत से ही शानदार लय बनाए रखी।

704 अंक के साथ क्वालिफिकेशन राउंड में भी किया कमाल

शीतल देवी ने महिला कंपाउंड रैंकिंग राउंड में कुल 720 में से 704 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।

इस दौरान उन्होंने 57 बार 10 अंकों वाले निशाने पर तीर लगाया। इनमें से 32 तीर लक्ष्य के बिल्कुल बीच मौजूद एक्स रिंग में लगे। यह आंकड़ा उनकी सटीकता और लगातार एकाग्रता बनाए रखने की क्षमता को दर्शाता है।

शीतल ने अपने ही पुराने प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ा। हांगझोऊ में आयोजित पिछले एशियाई पैरा गेम्स में उन्होंने 680 अंक हासिल किए थे। इस बार 704 अंक तक पहुंचकर उन्होंने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार दर्ज किया।

उनका यह स्कोर पेरिस 2024 पैरालंपिक में तुर्किये की ओजनुर चुरे गिर्दी के बनाए रिकॉर्ड के बराबर भी बताया गया है। इस तरह शीतल ने व्यक्तिगत स्पर्धा में अपनी ताकत दिखाई और आगे के मुकाबलों के लिए भारत की उम्मीदें बढ़ा दीं।

बिना हाथों के तीरंदाजी, फिर भी दुनिया के रिकॉर्ड पर निशाना

जम्मू-कश्मीर की रहने वाली शीतल देवी की कहानी उनकी उपलब्धियों को और खास बनाती है। वह जन्म से ही बिना हाथों के हैं। इसके बावजूद उन्होंने तीरंदाजी को अपना खेल चुना और अपनी तकनीक विकसित करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

शीतल धनुष चलाने के लिए अपने पैरों के साथ कंधे और जबड़े का इस्तेमाल करती हैं। यह तकनीक उनके अभ्यास, संतुलन और शरीर पर नियंत्रण का नतीजा है। जिस खेल में खिलाड़ियों को बेहद सटीक निशाना लगाना होता है, उसमें इस तरह की विशेष तकनीक के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाना उनकी मेहनत और तैयारी को सामने लाता है।

शीतल की उपलब्धि का महत्व सिर्फ पदक या रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। उनका प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि सही प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति के सहारे खिलाड़ी बड़ी चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं।

टीम इवेंट में भी भारत का दबदबा, तोमन कुमार के साथ बनाया रिकॉर्ड

शीतल देवी ने केवल व्यक्तिगत स्पर्धा में ही नहीं, बल्कि टीम इवेंट में भी शानदार प्रदर्शन किया। उनके और तोमन कुमार के संयुक्त प्रयास से मिश्रित टीम रैंकिंग राउंड में 1,402 अंक का विश्व रिकॉर्ड बना।

तोमन कुमार ने पुरुष कंपाउंड रैंकिंग राउंड में 698 अंक हासिल किए। शीतल और तोमन के संयुक्त स्कोर ने इससे पहले के 1,400 अंकों के विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह पिछला रिकॉर्ड शीतल देवी और राकेश कुमार ने इसी साल अहमदाबाद में बनाया था।

शीतल इससे पहले भी भारत को बड़ी उपलब्धियां दिला चुकी हैं। पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। वहीं, हांगझोऊ एशियाई पैरा गेम्स में उनके खाते में दो स्वर्ण और एक रजत पदक आए थे।

एशियाई पैरा गेम्स 2026 में उनका ताजा प्रदर्शन भारतीय दल के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। व्यक्तिगत मुकाबले में विश्व रिकॉर्ड और मिश्रित टीम स्पर्धा में ऐतिहासिक स्कोर के साथ शीतल ने अपनी प्रतिभा का एक बार फिर परिचय दिया है। अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें उनके आगामी मुकाबलों और पदक जीतने की संभावनाओं पर रहेंगी।