2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी मोहम्मद तनवीर की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े तनवीर ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए जेल में तनवीर के आचरण और मानसिक स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट से मामले के मूल रिकॉर्ड भी मंगाए हैं। अदालत का यह आदेश 9 अक्टूबर 2026 को दिया गया था, जिसकी प्रति सोमवार को सामने आई। इस फैसले का मतलब सजा से स्थायी राहत मिलना नहीं है, बल्कि फिलहाल फांसी की सजा पर अमल रोककर मामले की आगे जांच और सुनवाई करना है।
मोहम्मद तनवीर की फांसी पर क्यों लगी रोक?
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मोहम्मद तनवीर की मौत की सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया। इस पीठ में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल थे।
तनवीर ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले के 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका पर विचार करते हुए फिलहाल फांसी की सजा के अमल पर रोक लगा दी है।
अदालत ने इस स्तर पर दोषसिद्धि को रद्द करने या तनवीर को बरी करने का फैसला नहीं दिया है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि फांसी पर रोक लगने का अर्थ दोषी को आरोपों से मुक्त करना नहीं होता। यह आदेश मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सजा पर अमल रोकने से संबंधित है।
जेल में व्यवहार और मानसिक स्थिति की जांच के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित जेल अधीक्षक को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें जेल में रहने के दौरान तनवीर के कामकाज, आचरण और व्यवहार की जानकारी देनी होगी।
इसके अलावा, अदालत ने किसी सरकारी अस्पताल के माध्यम से तनवीर का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने को कहा है। इस जांच की रिपोर्ट भी आठ सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करनी होगी।
इन निर्देशों से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट मामले से जुड़े अतिरिक्त पहलुओं की जानकारी जुटाना चाहता है। जेल में बंद व्यक्ति के व्यवहार और मनोवैज्ञानिक स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट आगे की न्यायिक प्रक्रिया में प्रासंगिक हो सकती है। हालांकि, अदालत ने इन रिपोर्टों के आधार पर अंतिम रूप से क्या फैसला लिया जाएगा, यह अभी तय नहीं किया है।
गुजरात सरकार और निचली अदालतों से भी मांगे दस्तावेज
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट से सभी मूल रिकॉर्ड मंगाए हैं। इसके साथ ही गुजरात सरकार को आठ सप्ताह के भीतर प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
इन दस्तावेजों और रिपोर्टों के सामने आने के बाद अदालत मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार कर सकेगी। फिलहाल, मौत की सजा पर रोक एक अंतरिम राहत है। इसका अंतिम नतीजा आगे होने वाली सुनवाई और अदालत के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट इससे पहले इसी मामले के एक अन्य दोषी अब्बू अबुबकर बरेलवी की फांसी की सजा पर भी रोक लगा चुका है। इससे स्पष्ट है कि इस मामले में दोषियों की सजा से संबंधित अलग-अलग याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
क्या था 2008 का अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला?
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को करीब 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह घटना देश के सबसे गंभीर आतंकी हमलों में गिनी जाती है।
इस मामले में विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी। बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी।
अब मोहम्मद तनवीर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर फिलहाल रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट और रिकॉर्ड मांगे हैं। आगे की सुनवाई में इन दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस मामले में पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की प्रक्रिया का अंतिम नतीजा अहम है। हालांकि, अदालत का मौजूदा आदेश किसी अंतिम निष्कर्ष का संकेत नहीं देता। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तनवीर की मौत की सजा पर अमल तब तक रुका रहेगा, जब तक अदालत के निर्देशों और आगे की कार्यवाही के तहत स्थिति स्पष्ट नहीं होती।


