बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की कानूनी लड़ाई आने वाले महीने में एक बार फिर अहम मोड़ पर पहुंच सकती है। गुजरात हाईकोर्ट उसकी उस अपील पर 30 नवंबर को सुनवाई करेगा, जिसमें उसने 2013 के बलात्कार मामले में दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है। इस बीच, राजस्थान से जुड़े दूसरे बलात्कार मामले में उसकी अपील 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। आसाराम के वकील ने गुजरात हाईकोर्ट को इस तारीख की जानकारी दी थी। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद रखने का फैसला किया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आसाराम के खिलाफ गुजरात और राजस्थान में दर्ज दोनों मामलों में अलग-अलग अदालतों ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अब उसकी अपीलों पर होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि संबंधित अदालतें उसकी दलीलों पर क्या रुख अपनाती हैं।
गुजरात हाईकोर्ट ने क्यों टाली सुनवाई? 30 नवंबर की तारीख तय
मंगलवार, 27 अक्टूबर को गुजरात हाईकोर्ट में आसाराम की अपील का मामला सामने आया। उसके वकील ने अदालत को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट में 17 नवंबर को अंतिम सुनवाई होनी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आसाराम की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
वकील की दलील सुनने के बाद जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने मामले को 17 नवंबर के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। इसके तहत गुजरात हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की गई।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट में पहले से निर्धारित कार्यवाही को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस आदेश का अर्थ आसाराम की सजा में किसी बदलाव या राहत से नहीं है।
गुजरात का 2013 वाला मामला क्या है, जिसमें मिली उम्रकैद?
गुजरात के गांधीनगर सत्र न्यायालय ने आसाराम को 2013 के बलात्कार मामले में दोषी ठहराया था। इस मामले में आरोप था कि उसने वर्ष 2001 से 2006 के बीच अहमदाबाद स्थित अपने आश्रम में एक शिष्या के साथ बार-बार बलात्कार किया।
इस मामले में सत्र न्यायालय ने वर्ष 2023 में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब वह इसी दोषसिद्धि और सजा को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दे रहा है।
30 नवंबर को होने वाली सुनवाई में उसकी अपील से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्यवाही होगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने अभी उसकी सजा पर कोई नया फैसला नहीं सुनाया है।
किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करना आरोपी का कानूनी अधिकार है। लेकिन अपील दाखिल होने या सुनवाई की तारीख तय होने से दोषसिद्धि अपने आप समाप्त नहीं होती। इसके लिए संबंधित अदालत का आदेश जरूरी होता है।
राजस्थान के मामले में 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
आसाराम के खिलाफ राजस्थान में भी एक अलग बलात्कार का मामला है। इस मामले में उसे वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था। इस मामले में भी उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। आसाराम ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह नवंबर में इस चुनौती पर सुनवाई करेगा। अब यह अपील 17 नवंबर को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
यही वजह है कि गुजरात हाईकोर्ट में आसाराम के वकील ने पहले सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होने का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए गुजरात वाले मामले को बाद की तारीख पर रखने का फैसला किया।
अब आगे क्या होगा? दोनों मामलों में अदालतों के फैसलों पर नजर
आसाराम के दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग अदालतों में चल रही है। गुजरात हाईकोर्ट में 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई गांधीनगर के उस मामले से संबंधित है, जिसमें उसे 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं, 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट राजस्थान वाले मामले में उसकी अपील पर सुनवाई करेगा।
इन तारीखों पर अदालतों की कार्यवाही और उनके आदेश आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में किसी भी मामले में आसाराम को नई राहत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर पीड़ितों को न्याय मिलने, आपराधिक मामलों में अपील की प्रक्रिया और न्यायिक फैसलों को लेकर लोगों की नजर बनी रहेगी। हालांकि, दोनों मामलों में आगे क्या निर्णय होगा, यह अदालतों की सुनवाई और उनके आदेशों पर निर्भर करेगा।
Case Title: Ashumal @ Asharam v. State of Gujarat & Anr.



