उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुई शिक्षक और स्नातक चुनाव की मतगणना के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर मतगणना में कथित गड़बड़ी और प्रशासनिक पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को हराने की साजिश का दावा करते हुए कहा कि बीजेपी वोट से नहीं, बल्कि ‘खोट’ से जीतती है। वहीं, आगरा में सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी अखिलेश ने चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से भी इन मामलों का संज्ञान लेने की मांग की है।
इन आरोपों के बीच चुनावी नतीजों की तस्वीर भी सामने आ रही है। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बीजेपी ने मेरठ की शिक्षक और स्नातक सीटों सहित कुछ सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि वाराणसी शिक्षक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई है। कुछ सीटों पर मुकाबला जारी रहने के बीच मतगणना की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
संजयन त्रिपाठी के मामले में अखिलेश का हमला, मतगणना पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. संजयन त्रिपाठी को मतगणना में कथित गड़बड़ी के जरिए हराने की कोशिश की गई। अखिलेश ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक कारण होने का भी दावा किया।
सपा अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बीजेपी और उससे जुड़े लोगों ने चुनाव जीतने के लिए हर हद पार कर दी है। उन्होंने प्रशासन के कुछ अधिकारियों की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संजयन त्रिपाठी के साथ हुए व्यवहार को शिक्षक समाज याद रखेगा।
अखिलेश ने अपने बयान में कहा कि मामला सिर्फ एक सपा उम्मीदवार को हराने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे दूसरे राजनीतिक कारण भी हैं। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी चुनाव में वोट के बजाय गड़बड़ी के सहारे जीत हासिल करती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटनाक्रम से शिक्षकों में नाराजगी पैदा हुई है। अखिलेश ने चेतावनी दी कि शिक्षक समाज 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसका जवाब दे सकता है।
हालांकि, मतगणना में गड़बड़ी और साजिश से जुड़े ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या बीजेपी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।
आगरा में आकाश अग्रवाल के साथ क्या हुआ? अखिलेश ने चुनाव आयोग से की दखल की मांग
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल को लेकर भी विवाद सामने आया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव में बढ़त बनाए हुए सपा प्रत्याशी के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया।
उन्होंने प्रशासन से आकाश अग्रवाल को तत्काल जीत का प्रमाणपत्र देने की मांग की। साथ ही चुनाव आयोग से मामले पर ध्यान देने की अपील की। अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से भी इस घटनाक्रम का संज्ञान लेने का आग्रह किया।
अखिलेश ने इस मामले को सामाजिक समीकरणों से जोड़ते हुए कहा कि PDA में ‘A’ का अर्थ अब अग्रवाल भी है। उन्होंने दावा किया कि आकाश अग्रवाल के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसा से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद अग्रवाल समाज में नाराजगी है।
आगरा सीट पर सपा के आकाश अग्रवाल और बीजेपी के हरि किशोर तिवारी के बीच मुकाबला बताया गया है। सपा नेताओं का दावा है कि आकाश अग्रवाल चुनाव जीत चुके हैं, जबकि उपलब्ध चुनावी अपडेट में उन्हें बढ़त बनाए हुए बताया गया है। इसलिए अंतिम नतीजे और जीत के प्रमाणपत्र की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है।
इस विवाद का असर राजनीतिक दलों के साथ-साथ उन मतदाताओं और शिक्षक समुदाय पर भी पड़ सकता है, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर जवाब चाहते हैं।
शिक्षकों की नाराजगी और 2027 का चुनाव, अखिलेश ने दिया सियासी संदेश
अखिलेश यादव ने अपने बयान में शिक्षकों के सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासन में शिक्षकों को अपमान का सामना करना पड़ा है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने शिक्षकों से चारा इकट्ठा करने तक का काम करवाने के कथित षड्यंत्र का जिक्र किया।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक समुदाय इन घटनाओं को भूलेगा नहीं और 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जवाब दे सकता है। उन्होंने डॉ. संजयन त्रिपाठी और उनके समाज के साथ खड़े रहने की बात भी कही।
इस बयान के जरिए अखिलेश ने एमएलसी चुनाव के विवाद को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ने की कोशिश की है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या भले ही विधानसभा चुनावों के मुकाबले सीमित हो, लेकिन इन चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए अहम संदेश देते हैं।
शिक्षक समुदाय की नाराजगी, उम्मीदवारों की शिकायतें और मतगणना को लेकर उठे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इन घटनाओं का 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।
UP MLC चुनाव में किसका पलड़ा भारी? 11 सीटों पर मुकाबले की तस्वीर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हुआ। मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था और मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीजेपी ने मेरठ शिक्षक, मेरठ स्नातक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और लखनऊ शिक्षक सीटों पर जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी ने वाराणसी शिक्षक सीट पर जीत हासिल की। आगरा शिक्षक सीट पर सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल आगे बताए गए, जबकि कुछ अन्य सीटों पर मतगणना के दौरान बढ़त की स्थिति सामने आई।
शुरुआती अपडेट में वाराणसी स्नातक, झांसी स्नातक और आगरा शिक्षक सीट पर सपा की बढ़त का जिक्र था। वहीं, कुछ सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार आगे बताए गए थे। चुनाव में कुल 152 उम्मीदवार मैदान में थे।
इन आंकड़ों को अंतिम परिणाम से अलग समझना जरूरी है। मतगणना के दौरान बढ़त बदल सकती है और किसी उम्मीदवार की आधिकारिक जीत की पुष्टि संबंधित चुनावी परिणाम से ही होती है।
फिलहाल, एमएलसी चुनाव के नतीजों के साथ-साथ मतगणना में कथित गड़बड़ी के आरोप भी चर्चा में हैं। अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासन इन शिकायतों पर क्या रुख अपनाते हैं। निष्पक्ष मतगणना और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
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