बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। चुनाव में NDA की सहयोगी JDU के उम्मीदवारों को हराने वाले दो निर्दलीय विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। शनिवार को हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में दोनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। खास बात यह है कि दोनों ने विधान परिषद चुनाव में NDA समर्थित JDU उम्मीदवारों को शिकस्त दी थी। अब चुनाव जीतने के बाद उनका बीजेपी में शामिल होना बिहार के सियासी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बीच JDU नेता आनंद पुष्कर ने बीजेपी के कुछ नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इससे NDA के भीतर चुनावी तालमेल और सहयोग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
JDU उम्मीदवारों को हराकर बने MLC, अब BJP का थामा दामन
बिहार विधान परिषद के तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने NDA समर्थित JDU प्रत्याशी अभिषेक झा को हराकर जीत दर्ज की थी। चुनाव के बाद अब उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है।
पार्टी में शामिल होने के बाद बंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि वह शिक्षकों के हितों के लिए पहले की तरह अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि शिक्षकों के कल्याण के लिए काम करने के उद्देश्य से उन्होंने बीजेपी का साथ चुना है।
ब्रजवासी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनकी बातचीत हुई थी। इसके बाद बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें अधिकारियों के साथ बैठकर शिक्षकों की समस्याओं पर चर्चा करने की सलाह दी है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
ब्रजवासी ने साफ किया कि विधान परिषद में उनका मुख्य एजेंडा शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को उठाना और उनके हितों के लिए काम करना रहेगा।
राहुल राज की भी BJP में वापसी, 1815 वोटों से हराया था JDU उम्मीदवार
बीजेपी में शामिल होने वाले दूसरे विधान पार्षद डॉ. राहुल राज हैं। उन्होंने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस मुकाबले में उन्होंने NDA समर्थित JDU प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1,815 वोटों से हराया।
चुनाव के अंतिम नतीजों के अनुसार, राहुल राज को 4,965 वोट मिले, जबकि आनंद पुष्कर के खाते में 3,150 वोट आए।
राहुल राज का बीजेपी से पुराना जुड़ाव रहा है। वह पहले पार्टी में राज्य स्तर के पदाधिकारी रह चुके हैं और प्रदेश कार्यकारिणी समिति के सदस्य भी रहे हैं। हालांकि, विधान परिषद चुनाव में पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
इस फैसले के बाद बीजेपी ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब चुनाव जीतने के बाद उनकी पार्टी में वापसी हो गई है।
राहुल राज ने कहा कि उनका बीजेपी से करीब 15 साल पुराना संबंध है। उन्होंने पार्टी में दोबारा शामिल होने के पीछे मतदाताओं के भरोसे को वजह बताया। उनका कहना है कि वह चुनाव में मिले समर्थन के अनुरूप काम करना चाहते हैं।
JDU नेता आनंद पुष्कर ने BJP नेताओं पर उठाए सवाल
दो निर्दलीय MLC के बीजेपी में शामिल होने के बाद गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से JDU उम्मीदवार रहे आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बीजेपी के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पुष्कर ने पूछा कि गठबंधन में सहयोग और समर्थन की जिम्मेदारी क्या सिर्फ तभी याद आती है, जब बीजेपी के अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में होते हैं? क्या यही जिम्मेदारी सहयोगी दलों के प्रत्याशियों के लिए भी निभाई जाती है?
उन्होंने बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी और मोतिहारी के सांसद राधा मोहन सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। पुष्कर का आरोप है कि बीजेपी के कई नेता चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हैं और उनके नाम पर वोट मांगते हैं। लेकिन जब JDU उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात आती है, तो वैसा सहयोग देखने को नहीं मिलता।
आनंद पुष्कर ने यह भी कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि मौजूदा विधान परिषद सदस्य को चुनाव नहीं लड़ने के लिए मना लिया जाएगा और वह गठबंधन के फैसले का सम्मान करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अंत में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।
क्या पहले से तय थी निर्दलीय उम्मीदवार की BJP में एंट्री?
आनंद पुष्कर ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक और सवाल उठाया है। उन्होंने आशंका जताई कि क्या निर्दलीय उम्मीदवार के चुनाव जीतने के बाद बीजेपी में शामिल होने की योजना पहले से तैयार थी?
उनका सवाल है कि गठबंधन के नेताओं को लगातार यह भरोसा क्यों दिलाया गया कि मौजूदा MLC चुनाव नहीं लड़ेंगे, जबकि अंत में वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर गए।
हालांकि, बीजेपी में शामिल होने वाले दोनों नेताओं की ओर से किसी पूर्व नियोजित राजनीतिक रणनीति की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पुष्कर के आरोपों को फिलहाल उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, बिहार MLC चुनाव के बाद दो निर्दलीय नेताओं का बीजेपी में शामिल होना NDA के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ बीजेपी को दो नए विधान पार्षद मिले हैं, वहीं दूसरी तरफ JDU के भीतर सहयोगी दलों की चुनावी भूमिका को लेकर असंतोष सामने आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के नेता इस विवाद को किस तरह संभालते हैं।

