मेघालय हाईकोर्ट ने अवैध रूप से भारत में रहने के आरोपी दो बांग्लादेशी नागरिकों की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट, फॉरेनर्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत अपराधों में शामिल होने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के 10 गवाहों में से केवल एक की गवाही बाकी है। ऐसे में मुकदमे के इस चरण पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
तीसरी बार जमानत के लिए पहुंचे थे आरोपी
मामले में आवेदक सैम हुसैन और माफुजुर रहमान दोनों बांग्लादेशी नागरिक हैं। उनके खिलाफ नोंगहिलम पुलिस स्टेशन में केस नंबर 09/2025 दर्ज किया गया था, जिसे बाद में सेशन केस नंबर 11/2025 के रूप में दर्ज किया गया।
दोनों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 483 के तहत तीसरी जमानत याचिका दाखिल की थी। आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष के सबूत उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला साबित नहीं करते।
उन्होंने कोर्ट को यह भरोसा भी दिलाया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त जमानतदार पेश कर सकते हैं।
राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध
राज्य सरकार ने आरोपों की गंभीरता और आरोपियों के फरार होने की आशंका का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपियों को रिहा करना उचित नहीं होगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की अदालत में हुई। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और मुकदमे की मौजूदा स्थिति पर गौर किया।
10 में से 9 गवाहों की हो चुकी है गवाही
हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के कुल 10 गवाहों में से 9 की पूछताछ पूरी हो चुकी है और अब केवल एक गवाह से पूछताछ बाकी है। कोर्ट के मुताबिक, मुकदमा लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में जमानत देने के बजाय ट्रायल को जल्द पूरा करना उचित होगा।
जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह ने कहा कि जब केवल एक गवाह की गवाही बाकी है, तो न्याय के हित में जमानत याचिका स्वीकार करने का कोई कारण नहीं बनता।
ट्रायल कोर्ट को जल्द सुनवाई पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से अनुरोध किया कि मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाई जाए और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
यह मामला Shri Saem Hussain v. State of Meghalaya के नाम से दर्ज है।


