उत्तर प्रदेश समेत पांच चुनावी राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर्स की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक, इन राज्यों में पहले करीब 18.71 करोड़ मतदाता थे, लेकिन अंतिम सूची में यह संख्या घटकर लगभग 16.43 करोड़ रह गई। यानी करीब 2.29 करोड़ नाम कम हुए हैं। सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिखाई दिया है, जहां अकेले कुल गिरावट का करीब 90 फीसदी हिस्सा दर्ज किया गया। इन राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में मतदाता सूची में हुआ यह बदलाव अहम माना जा रहा है।
यूपी में सबसे ज्यादा असर, 2.04 करोड़ वोटर कम
पांच राज्यों में मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट उत्तर प्रदेश में हुई है। SIR से पहले राज्य में करीब 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने पर यह संख्या घटकर 12.56 करोड़ रह गई थी।
दावों और आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13.40 करोड़ हो गई। इसके बावजूद पुरानी सूची के मुकाबले करीब 2.04 करोड़ नाम कम रहे। यह कुल मतदाताओं का लगभग 13.24 फीसदी है।
ड्राफ्ट सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे। इनमें से लगभग 84 लाख नाम दोबारा जोड़ दिए गए। यानी हटाए गए नामों में करीब 29 फीसदी की वापसी हुई। पांचों राज्यों में कुल गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से आया है।
पंजाब और उत्तराखंड में भी लाखों नाम घटे
पंजाब में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या ड्राफ्ट सूची में करीब 2.15 करोड़ से घटकर 1.94 करोड़ रह गई थी। अंतिम सूची में यह आंकड़ा बढ़कर 2.01 करोड़ हो गया। इसके बावजूद राज्य में करीब 14 लाख मतदाता कम हुए, जो कुल संख्या का लगभग 6.34 फीसदी है।
पंजाब में हटाए गए नामों की वापसी भी दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहतर रही। ड्राफ्ट सूची से हटाए गए करीब 21 लाख नामों में से लगभग 7 लाख दोबारा जोड़ दिए गए।
उत्तराखंड में पहले करीब 80 लाख मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 71 लाख रह गई और अंतिम सूची में बढ़कर 72 लाख पहुंची। इस तरह राज्य में करीब 8 लाख यानी 10.07 फीसदी मतदाता कम हुए। हटाए गए नामों में से लगभग 3 फीसदी ही वापस जुड़ पाए।
गोवा और मणिपुर में क्या बदली मतदाताओं की संख्या?
मणिपुर में SIR से पहले करीब 20.9 लाख मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 19.3 लाख रह गई। अंतिम सूची में सुधार के बाद आंकड़ा 19.6 लाख पहुंचा। इस तरह राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 6.33 फीसदी की कमी दर्ज की गई। ड्राफ्ट सूची से हटाए गए करीब 17 फीसदी नाम दोबारा शामिल हुए।
गोवा में भी मतदाता सूची में बड़ी कटौती हुई। यहां SIR से पहले 11.85 लाख मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 10.85 लाख और अंतिम सूची में घटकर 10.58 लाख रह गई। यानी राज्य में करीब 1.3 लाख या 10.76 फीसदी मतदाता कम हुए।
इन पांचों राज्यों में गोवा ऐसा राज्य रहा, जहां अंतिम सूची में ड्राफ्ट सूची के मुकाबले भी मतदाताओं की संख्या घट गई।
2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है SIR?
चुनाव आयोग ने हाल ही में 17 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को उसमें शामिल होने का मौका देना है। आयोग के मुताबिक, जो युवा 1 जनवरी को या उससे पहले 18 साल के हो जाएंगे, वे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। वहीं, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले तक चुनाव करा सकता है। ऐसे में SIR के बाद तैयार हुई मतदाता सूची आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।



