NCP में फिर बढ़ी हलचल! अमित शाह से मिले 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

NCP में फिर बढ़ी हलचल! अमित शाह से मिले 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। सोमवार, 2 नवंबर को पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे शामिल हुए। खास बात यह रही कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार तथा उनके बेटे पार्थ पवार बैठक में मौजूद नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, नाराजगी और दोनों NCP गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अजित पवार के बाद नेतृत्व को लेकर उठे सवाल

28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था। उनके जाने के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व और संगठन को संभालने की चुनौती खड़ी हुई। बाद में सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। 26 फरवरी को NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

इसके बाद पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने का फैसला हुआ। वहीं प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सुनील तटकरे महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते रहे।

हालांकि, सुनेत्रा पवार के साथ उनके बेटों पार्थ और जय पवार की बढ़ती भूमिका को लेकर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की खबरें सामने आती रहीं। मई में पार्टी पदाधिकारियों की सूची जारी होने के बाद भी विवाद हुआ था। इस सूची में पार्थ और जय को अहम जिम्मेदारियां दी गई थीं, जबकि प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल नहीं थे।

अमित शाह से मुलाकात में सुनेत्रा और पार्थ क्यों नहीं थे?

NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात को पार्टी के मौजूदा राजनीतिक हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दी।

हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पार्टी में किसी तरह की नाराजगी से इनकार किया है। उनका कहना है कि दिल्ली में होने वाली यह बैठक पहले से तय थी और पार्टी के सभी नेता सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट हैं।

पार्टी ने भी अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज किया है। सुनेत्रा पवार ने अपने विधायकों की बैठक भी बुलाई है। ऐसे में पार्टी के भीतर आगे की रणनीति को लेकर होने वाली चर्चा अहम मानी जा रही है।

शरद पवार गुट के साथ विलय पर फिर चर्चा

NCP में इस हलचल के बीच दोनों गुटों के विलय का मुद्दा भी फिर सामने आया है। साल 2023 में अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर बीजेपी और शिवसेना के साथ सरकार में शामिल होने का फैसला किया था। इसके बाद NCP दो हिस्सों में बंट गई थी।

अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों को एक करने की कोशिशें तेज हुई थीं। शरद पवार गुट के नेताओं ने दावा किया था कि अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच विलय को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, उनके निधन के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने विलय की पहल को लेकर अलग रुख दिखाया था। मई में शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने भी कहा था कि उनकी तरफ से विलय का मुद्दा बंद हो चुका है। अब दिल्ली में हुई बैठक के बाद इस विषय पर फिर अटकलें लगने लगीं। हालांकि, NCP ने साफ किया है कि शरद पवार गुट के साथ विलय का कोई सवाल नहीं है।

दोनों गुटों की ताकत का क्या है गणित?

दोनों गुटों के विलय की चर्चा में नेतृत्व के साथ-साथ विधायकों और सांसदों की संख्या भी महत्वपूर्ण है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अजित पवार गुट के पास लोकसभा में एक, राज्यसभा में चार, महाराष्ट्र विधानसभा में 41 और विधान परिषद में 10 सदस्य हैं। इनकी कुल संख्या 56 बताई गई है।

वहीं, शरद पवार गुट के पास लोकसभा में आठ, राज्यसभा में एक, विधानसभा में 10 और विधान परिषद में दो सदस्य हैं। इस तरह उसके पास कुल 21 सदस्य बताए गए हैं।

लोकसभा में शरद पवार गुट की संख्या ज्यादा है, जबकि राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद में अजित पवार गुट आगे है। अगर भविष्य में दोनों गुटों के एक होने की कोई पहल होती है, तो पार्टी का नेतृत्व और संगठन में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सबसे बड़ा सवाल होगा।