भारत के घरेलू मामलों में विदेशी फंडिंग से दखल का शक! ED के रडार पर दो विदेशी कंपनियां, 13.5 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की जांच तेज

भारत के घरेलू मामलों में विदेशी फंडिंग से दखल का शक! ED के रडार पर दो विदेशी कंपनियां, 13.5 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की जांच तेज

भारत के घरेलू मामलों में कथित विदेशी हस्तक्षेप और संदिग्ध फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी जांच शुरू की है। जांच एजेंसी करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 13.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह रकम जर्मनी, लिथुआनिया, कनाडा, ब्रिटेन और दुबई जैसे कई देशों के जरिए घुमाकर भारत में कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचाई गई। ED को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में विदेशी कंपनियों और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। जांच के दायरे में दो विदेशी फंडिंग संस्थाएं और कई कंपनियां हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस पैसे का वास्तविक स्रोत क्या था, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और भारत में इसके इस्तेमाल का उद्देश्य क्या था।

जर्मनी से शुरू हुई फंडिंग, कई देशों के रास्ते भारत पहुंची रकम

ED की शुरुआती जांच के मुताबिक, संदिग्ध फंडिंग का एक हिस्सा जर्मनी के डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट से शुरू हुआ था। जांच एजेंसी को शक है कि जर्मनी के नियमों से बचने के लिए इस रकम को सीधे भारत भेजने के बजाय दूसरे देशों के वित्तीय नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाया गया।

इसके लिए लिथुआनिया की कंपनी ‘एक्स-बेस डिजिटल यूएबी’ (XBase Digital UAB) का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

जांच में सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड कंपनी ‘TCC Digital Markets Ltd’ को भी करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर के फंड का स्रोत पाया गया है।

ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन किस उद्देश्य से किए गए और क्या इनके जरिए फंडिंग के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश हुई थी।

दो किस्तों में ब्रिटिश कंपनी के खाते में पहुंचे 13 करोड़ रुपये के नेटवर्क का हिस्सा

जांच में सामने आया है कि फरवरी से मार्च 2026 के बीच संदिग्ध रकम को कई माध्यमों से ब्रिटेन की एक कंपनी तक पहुंचाया गया।

जानकारी के मुताबिक, डिजिटल संपत्तियों और हवाला नेटवर्क के जरिए दुबई तथा लिथुआनिया के रास्ते ब्रिटेन में Airwallex (UK) Ltd के खाते तक पैसा पहुंचा।

TCC Digital Markets Ltd ने इस रकम को ग्रांट यानी अनुदान के रूप में दो अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर किया। इन किस्तों की राशि 67,006 ब्रिटिश पाउंड और 71,746 ब्रिटिश पाउंड बताई गई है।

इसके बाद ब्रिटिश कंपनी के माध्यम से यह पैसा भारत में कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। खासतौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि ब्रिटेन में पैसा पहुंचने के बाद किन खातों में ट्रांसफर हुआ और भारत में इसे किन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।

कनाडा की कंपनी से भी 5 लाख डॉलर ट्रांसफर, ED को मिला दूसरा फंडिंग नेटवर्क

इस मामले में जांच का दायरा केवल जर्मनी और लिथुआनिया तक सीमित नहीं है। ED को कनाडा में रजिस्टर्ड एक अन्य कंपनी ‘ZBase Digital Inc’ के जरिए भी करीब 5 लाख अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर किए जाने की जानकारी मिली है।

जांच के अनुसार, फरवरी 2026 में यह रकम भी ब्रिटेन की उसी कंपनी के Airwallex खाते में भेजी गई थी।

इस तरह दोनों स्रोतों से जुड़े लेनदेन की कुल संदिग्ध राशि करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 13.5 करोड़ रुपये बैठती है।

एजेंसी यह जांच रही है कि क्या दोनों विदेशी कंपनियों के बीच कोई साझा वित्तीय कड़ी है और क्या इनका इस्तेमाल भारत में पैसा पहुंचाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत किया गया।

इस पूरे मामले में Airwallex की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, केवल किसी भुगतान प्लेटफॉर्म के खाते से रकम गुजरने के आधार पर उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। जांच एजेंसियां लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और वास्तविक लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही हैं।

टैक्स बचाने वाले देशों के रास्ते फंडिंग का शक, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मांगा जा रहा सत्यापन

ED की जांच में सेंट किट्स एंड नेविस का नाम भी महत्वपूर्ण तरीके से सामने आया है। कैरिबियाई क्षेत्र में स्थित इस देश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और टैक्स व्यवस्था के संदर्भ में कम कर वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।

जांच एजेंसी को संदेह है कि अलग-अलग देशों में कंपनियां बनाकर और कई स्तरों पर रकम ट्रांसफर करके फंडिंग के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई हो सकती है।

फिलहाल भारतीय एजेंसियां Airwallex और संबंधित देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर इन लेनदेन का सत्यापन कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पैसा कहां से आया, किसके निर्देश पर भेजा गया और भारत में किन लोगों या संस्थाओं को इसका लाभ मिला।

इस मामले का आम लोगों पर फिलहाल कोई सीधा आर्थिक असर सामने नहीं आया है, लेकिन विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता और देश के घरेलू मामलों में संभावित बाहरी हस्तक्षेप के लिहाज से यह जांच महत्वपूर्ण है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी ED की जांच शुरुआती चरण में है। विदेशी फंडिंग के जरिए भारत के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप किए जाने का संदेह जांच का विषय है। इसे फिलहाल साबित हुआ अपराध नहीं माना जा सकता।