Ayodhya Deepotsav 2026: राम जन्मभूमि पर दीप जलने के साथ हर घर रोशन हो… CM योगी की प्रदेशवासियों से खास अपील, 10वें दीपोत्सव को बताया ऐतिहासिक

Ayodhya Deepotsav 2026: राम जन्मभूमि पर दीप जलने के साथ हर घर रोशन हो… CM योगी की प्रदेशवासियों से खास अपील, 10वें दीपोत्सव को बताया ऐतिहासिक

अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्रीराम जन्मभूमि पर लाखों दीपों की रोशनी के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर दीप जलें, तब प्रदेश के लोग भी अपने घरों और आंगनों में दीप प्रज्ज्वलित करें। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को केवल दीप जलाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक गौरव और सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या का यह दीपोत्सव वर्षों की प्रतीक्षा और करोड़ों लोगों की आस्था का परिणाम है। इस बार का आयोजन इसलिए भी खास है, क्योंकि दीपोत्सव के दस साल पूरे हो रहे हैं।

राम जन्मभूमि पर दीप जलें तो हर घर में भी हो रोशनी: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली और दीपोत्सव के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अयोध्या में होने वाला यह आयोजन हर भारतीय के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने अपनी अपील में कहा कि जब प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर दीप प्रज्ज्वलित हों, तो हर परिवार अपने घर-आंगन में भी दीप जलाकर इस उत्सव का हिस्सा बने।

योगी ने अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि मां सरयू के तट पर बसी यह पावन नगरी दिव्य दीपोत्सव के लिए पूरी तरह तैयार है। वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा और करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था अब लाखों दीपों की रोशनी के रूप में दिखाई देने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है।

2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव, अब बन चुका है सांस्कृतिक पहचान

योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के पिछले दस वर्षों के सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में मां सरयू के तट पर जिस संकल्प के साथ दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी, वह आज भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिला रहा है।

उनके मुताबिक, अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल दीप जलाने या विश्व रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है। यह प्रभु श्रीराम की नगरी के ऐतिहासिक वैभव, भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक आत्मसम्मान को फिर से स्थापित करने का माध्यम बन गया है।

राम की पैड़ी पर जलने वाले लाखों दीप आस्था के साथ स्थानीय स्वावलंबन और अंत्योदय का संदेश भी देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन ने अयोध्या की पहचान को नई ऊंचाई दी है। सदियों से जिस सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक विरासत की चर्चा होती रही है, उसे दीपोत्सव के जरिए एक नया स्वरूप मिला है।

उपराष्ट्रपति और विदेशी राजनयिक भी बनेंगे दीपोत्सव के साक्षी

मुख्यमंत्री ने 10वें दीपोत्सव में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंच रहे उपराष्ट्रपति, मित्र देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों, राजनयिकों और देश-विदेश से आने वाले विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया।

उन्होंने साधु-संतों और रामभक्तों का भी अभिनंदन किया। योगी ने कहा कि यह आयोजन समता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर है।

उनके मुताबिक, देश और विदेश से आने वाले मेहमानों की मौजूदगी इस आयोजन को और विशेष बनाएगी। अयोध्या के दीपोत्सव के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने दीपक के महत्व को समझाते हुए कहा कि दीपक केवल मिट्टी से बना एक पात्र नहीं है, बल्कि वह चेतना और सकारात्मकता का प्रतीक है। वह हमें सिखाता है कि अंधकार को दूर करने के लिए सिर्फ एक ज्योति जलाने की जरूरत होती है।

दीपोत्सव के जरिए रामराज्य और सेवा का संदेश देना चाहते हैं CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की कि दीपोत्सव के इस दसवें संस्करण को केवल उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में भी अपनाएं।

उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना का संदेश दिया, जहां विकास का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनके मुताबिक, सच्चे अर्थों में रामराज्य वही है, जहां समाज में समरसता हो, हर व्यक्ति को सम्मान मिले और सेवा की भावना सर्वोपरि रहे।

योगी ने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव हमारी आस्था, आत्मगौरव और सनातन चेतना के जागरण का पर्व है। इस आयोजन की असली सार्थकता तभी होगी, जब दीपों से मिलने वाला प्रकाश लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाए।

कुल मिलाकर, अयोध्या का दसवां दीपोत्सव इस बार धार्मिक आयोजन के साथ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री की अपील का संदेश साफ है—अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि पर दीप जलें, तो हर घर में भी आस्था और खुशियों का उजाला फैलना चाहिए।