‘वक्फ बाय यूजर’ क्या है, जिससे उलझ रहा वक्फ़ कानून केस! CJI से लेकर सिब्‍बल तक सबने पूछा—क्यों किया ऐसा?

‘वक्फ बाय यूजर’ क्या है, जिससे उलझ रहा वक्फ़ कानून केस! CJI से लेकर सिब्‍बल तक सबने पूछा—क्यों किया ऐसा?

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर चल रही सुनवाई के दौरान “वक्फ बाय यूजर” (Waqf by User) का मुद्दा गरमा गया। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से लेकर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तक ने सरकार से सवाल किया कि आखिर इस प्रावधान को हटाने की क्या वजह थी? सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए तय की।

क्या है “वक्फ बाय यूजर”?

वक्फ इस्लामिक कानून में एक अहम धार्मिक प्रथा है, जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति (जमीन, मकान आदि) को अल्लाह के नाम पर समर्पित कर देता है, ताकि उसका उपयोग सामाजिक या धार्मिक कार्यों के लिए हो सके। “वक्फ बाय यूजर” एक विशेष प्रकार का वक्फ है, जिसमें संपत्ति का मालिक उसे औपचारिक रूप से वक्फ घोषित किए बिना ही धार्मिक या सामाजिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करता रहता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अपनी ज़मीन पर मस्जिद या मदरसा बनवाता है और उसका इस्तेमाल करता रहता है, लेकिन उसे कानूनी तौर पर वक्फ डीड (रजिस्ट्रेशन) नहीं कराता, तो यह “वक्फ बाय यूजर” कहलाता है। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है, लेकिन नए वक्फ कानून में इसे खत्म कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों उठा विवाद?

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ एक्ट, 2013 की धाराओं को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई के दौरान “वक्फ बाय यूजर” पर जमकर बहस हुई। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को सामाजिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, तो सरकार उसे रजिस्ट्रेशन के लिए क्यों मजबूर कर रही है?”

CJI संजीव खन्ना ने कहा कि रजिस्ट्रेशन से संपत्ति का रिकॉर्ड रखना आसान होगा, लेकिन सरकार ने “वक्फ बाय यूजर” को ही खत्म कर दिया, जिससे समस्या पैदा हो रही है। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि फर्जी दावों से बचने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन सिब्बल ने जवाब दिया, “300 साल पुरानी संपत्तियों की वक्फ डीड कहां से लाएंगे लोग?”

सरकार ने क्यों बदला कानून?

नए वक्फ कानून के तहत अब “वक्फ बाय यूजर” को मान्यता नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी दावों पर रोक लगेगी और संपत्तियों का सही रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। हालांकि, विरोधियों का मानना है कि यह बदलाव मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल है।

क्या ख़ारिज हो जाएगा वक्फ़ कानून का यह हिस्सा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और सरकार से जवाब मांगा है। अगर कोर्ट इस प्रावधान को गलत ठहराता है, तो वक्फ कानून का एक बड़ा हिस्सा खारिज हो सकता है। अब सबकी निगाहें गुरुवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब सरकार अपना पक्ष रखेगी।