गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए जाने और लगातार 30 दिन तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के लिए बिल संसद में पेश हो गया है. इसके लिए लोकसभा में अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किए. विपक्ष की तरफ से इसे लेकर घोर आपत्ति जताई जा रही है. सवाल है कि आखिर इसकी जरूरत पड़ी क्यों, क्या इसका केजरीवाल वाले मामले से क्यों मतलब है?
दरअसल, एक समय ऐसा भी आया कि दिल्ली में 15 अगस्त 2024 को झंडा फहराएगा कौन? राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद थे. तब कोर्ट ने उन्हें हटाने में अपनी असमर्थता जताते हुए देश के संविधान और कानून के प्रावधान का हवाला दिया कि बगैर गिल्टी प्रूफ हुए या सजा मिले वो किसी का इस्तीफा नहीं मांगा सकते.
इस पर केंद्र सरकार और उसके वरिष्ठ मंत्रियों के जेहन में ये सवाल घर करने लगा कि आखिर संविधान के निर्माताओं ने ऐसी परिस्थिति के लिए कोई कानून के विषय में क्यों नहीं सोचा. काफी सोच समझकर इस निर्णय पर पहुंच गया कि राजनीति में सुचिता का स्थान बीते दिनों की बात होती जा रही है और लोक लाज का महत्व राजनेताओं में कम होता जा रहा है.
समाज के हर एक पहलू में गिरावट आई है तो राजनीति भी इससे अछूता नहीं है. एक मंत्री ने कहा कि सूचिता की जगह अब निर्लज्जता लेती जा रही है. ऐसे में एक ऐसे कानून की आवश्यकता है कि दिल्ली जैसी स्थिति का निर्माण दोबारा ना हो सके. पिछले साल जब केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था तो उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया. वो 177 दिन जेल में रहे. बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वो बाहर आए और फिर कोर्ट की शर्तों की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया.



