वन नेशन, वन इलेक्शन पर चल रही JPC की बैठक खत्म हो चुकी है. अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर एक्सपर्ट्स ने राय दी है. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी सांसद पी पी चौधरी ने की. बैठक में देश की अर्थव्यवस्था पर एक साथ चुनाव कराने के प्रभाव को लेकर प्रख्यात अर्थशास्त्रियों ने अपने विचार रखे. IMF की पूर्व डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन से चुनावों की संख्या कम होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा. उन्होंने इसे मैक्रोइकोनॉमिक दृष्टि से एक सकारात्मक सुधार बताया.
गीता गोपीनाथ ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि चुनावी वर्षों में निजी निवेश प्रभावित होता है. चुनाव के साल में निजी निवेश में लगभग 5% की गिरावट आती है और बाद के वर्षों में भी इसकी पूरी भरपाई नहीं हो पाती. उनके अनुसार, चुनावों की संख्या घटने से अनिश्चितता कम होगी, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा. गोपीनाथ ने यह भी बताया कि चुनावी वर्षों में प्राइमरी डेफिसिट बढ़ता है और कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी आती है. ऐसे में एक साथ चुनाव कराने से सरकारी खर्च की दक्षता और संरचना दोनों में सुधार हो सकता है.



