दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल की बड़ी चाल: जज बदलने की मांग पर नोटिस, अब 13 अप्रैल को अहम सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल की बड़ी चाल: जज बदलने की मांग पर नोटिस, अब 13 अप्रैल को अहम सुनवाई

दिल्ली की चर्चित शराब नीति मामले में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। Delhi High Court ने Central Bureau of Investigation को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal की उस याचिका पर जारी हुआ, जिसमें उन्होंने जस्टिस Swarana Kanta Sharma से खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे होगी, जहां इस अहम मुद्दे पर आगे बहस होगी।

क्या है पूरा मामला? शराब नीति केस से जुड़ा विवाद

यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी (Excise) नीति से जुड़ा है। इस नीति को बाद में अनियमितताओं के आरोपों के चलते वापस ले लिया गया था। CBI ने आरोप लगाया कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी मामले में केजरीवाल, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को बरी कर दिया था। हालांकि CBI ने इस फैसले को चुनौती दी, जिस पर फिलहाल हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश, निष्पक्ष सुनवाई पर उठाया सवाल

दिलचस्प बात यह रही कि अरविंद केजरीवाल खुद अदालत में पेश हुए और अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने नियमों के अनुसार जज के रिक्यूजल (स्वयं को अलग करने) की अर्जी दी है और इसे रिकॉर्ड पर लिया जाए। उनका तर्क है कि उन्हें आशंका है कि मामले की सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की कई याचिकाएं आई हैं और यह न्यायपालिका की छवि पर सवाल खड़ा करता है।

कोर्ट की टिप्पणी: सभी याचिकाएं एक साथ तय होंगी

कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल की याचिका को रिकॉर्ड पर लिया जाए और सभी पक्ष अपने जवाब दाखिल करें। साथ ही, अगर कोई और आरोपी भी जज के रिक्यूजल की मांग करना चाहता है, तो वह भी आवेदन दे सकता है। कोर्ट ने यह संकेत दिया कि सभी याचिकाओं पर एक साथ फैसला लिया जाएगा, ताकि मामला आगे बढ़ सके।

सुप्रीम कोर्ट का रास्ता भी अपनाया, लेकिन याचिका वापस

इससे पहले केजरीवाल ने मामले को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने के लिए Supreme Court of India का भी रुख किया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली। इससे साफ है कि अब उनकी पूरी रणनीति हाईकोर्ट में ही केंद्रित है।

राजनीतिक और कानूनी असर, दोनों पर नजर

यह मामला पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी और बाद में जमानत ने इसे और चर्चा में ला दिया था। अब जज बदलने की मांग ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट इस याचिका पर क्या फैसला देता है और क्या इससे पूरे केस की दिशा बदलती है।