बंगाल चुनाव से पहले बड़ा बदलाव: 91 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा बदलाव: 91 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। Election Commission of India के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। यह आंकड़ा चुनावी माहौल में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर मतदान और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

कैसे घटी मतदाताओं की संख्या? पूरी प्रक्रिया समझिए

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया में पहले ही 63.66 लाख वोटरों के नाम हटाए जा चुके थे, जो कुल मतदाताओं का करीब 8.3% था। इससे कुल मतदाता संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी। इसके बाद “अंडर एडजुडिकेशन” श्रेणी में रखे गए करीब 60 लाख मामलों की जांच हुई। इनमें से लगभग 27.16 लाख नाम और हटाए गए, जबकि करीब 32.68 लाख लोगों को दोबारा सूची में शामिल किया गया।

चुनाव आयोग का दावा: प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है। जिला स्तर का डेटा भी सार्वजनिक किया गया है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। हालांकि, कुछ मामलों में अभी औपचारिकताएं जैसे e-signature बाकी हैं, जिसके बाद आंकड़ों में मामूली बदलाव संभव है।

अब वोटर लिस्ट फ्रीज, आगे कोई बदलाव नहीं

चुनाव की तैयारी के तहत अब पहले चरण के लिए मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया गया है। 294 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि बाकी 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। नियमों के अनुसार, नामांकन की आखिरी तारीख के बाद अब इस सूची में कोई नया नाम जोड़ा नहीं जा सकता।

आम मतदाता के लिए क्या मतलब?

इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने का मतलब है कि कई लोगों को अपने नाम की स्थिति जांचनी जरूरी होगी। अगर किसी का नाम सूची में नहीं है, तो वह मतदान नहीं कर पाएगा। इसलिए चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच और सही जानकारी रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

आगे क्या? कानूनी प्रक्रिया से ही होंगे बदलाव

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि अब कोई भी नया नाम केवल कानूनी प्रक्रिया या संबंधित अधिकारियों के निर्देश के बाद ही जोड़ा जा सकता है। इससे साफ है कि अब पूरा ध्यान मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने पर है।