Narendra Modi ने महिला आरक्षण को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पहल का समर्थन करें। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जहां इस अहम संशोधन पर चर्चा और पारित करने की कोशिश होगी। यह कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
2029 चुनाव से लागू करने की तैयारी, क्या बदलेगा?
सरकार का लक्ष्य है कि महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो सके। इसके तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” यानी Nari Shakti Vandan Adhiniyam के तहत प्रस्तावित है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था बनी रहेगी।
जनगणना और परिसीमन की शर्तों में बदलाव
वर्तमान कानून के अनुसार, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू हो सकता था, जिससे इसकी समयसीमा 2034 तक खिसकने की आशंका थी। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर करने की योजना है। इससे इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा और आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ होगा।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी हैं और हर क्षेत्र में उनका योगदान लगातार बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, विज्ञान और उद्यमिता में उनकी उपलब्धियां देश को आगे बढ़ा रही हैं। इसके बावजूद, राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी से नीतियों में नई सोच और बेहतर निर्णय क्षमता आती है, जिससे शासन की गुणवत्ता सुधरती है।
पुराने प्रयास और अब का निर्णायक मोड़
महिला आरक्षण को लेकर पहले भी कई बार प्रयास हुए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। अलग-अलग सरकारों ने बिल पेश किए, समितियां बनीं, लेकिन कानून लागू नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से इस कानून को पारित किया था, जिसे उन्होंने अपने जीवन के खास पलों में से एक बताया। अब इसे लागू करने की दिशा में यह नया संशोधन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सभी दलों से अपील, लोकतंत्र को मजबूत करने का मौका
प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक मौके को समझें और एकजुट होकर महिलाओं के अधिकार को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा कदम है। उनके मुताबिक, हर देरी लोकतंत्र को कमजोर करती है और अब समय आ गया है कि महिलाओं को उनकी उचित भागीदारी मिले।
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