बंगाल में फिर 2021 जैसा माहौल? मुस्लिम वोट एकजुट होते दिखे, TMC की पकड़ फिर मजबूत

बंगाल में फिर 2021 जैसा माहौल? मुस्लिम वोट एकजुट होते दिखे, TMC की पकड़ फिर मजबूत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तेज हलचल दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में माहौल तेजी से बदल रहा है और अब स्थिति 2021 विधानसभा चुनाव जैसी बनती नजर आ रही है। खास बात यह है कि मुस्लिम वोट बैंक, जिसमें हाल तक कुछ बिखराव के संकेत मिल रहे थे, अब फिर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में संगठित होता दिख रहा है। इसका सीधा असर आगामी 2026 चुनाव पर पड़ सकता है।

टूटता गठबंधन, बदलता समीकरण

कुछ महीने पहले तक ऐसा लग रहा था कि टीएमसी का पारंपरिक अल्पसंख्यक आधार कमजोर हो रहा है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF), AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी जैसे छोटे दल मुस्लिम वोटों में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।

करीब 110 मुस्लिम बहुल सीटों पर यह चुनौती टीएमसी के लिए गंभीर मानी जा रही थी। लेकिन हाल के घटनाक्रमों—खासतौर पर AIMIM और AJUP के गठबंधन के टूटने—ने इस समीकरण को बदल दिया है। इसके साथ ही एक कथित स्टिंग वीडियो विवाद ने भी छोटे दलों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।

SIR और UCC ने बदला चुनावी माहौल

विश्लेषकों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और भाजपा द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के वादे ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।

आंकड़ों के अनुसार, SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम हटाए गए, जिनमें लगभग एक-तिहाई मुस्लिम बताए जा रहे हैं। इससे मतदाताओं में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। वहीं, UCC को लेकर भी अल्पसंख्यक समुदाय में चिंता देखी जा रही है।

“वोट बंटा तो नुकसान”—एकजुटता की भावना मजबूत

राजनीतिक विश्लेषक मैदुल इस्लाम का कहना है कि हाल के तीन हफ्तों में माहौल तेजी से बदला है। अब अल्पसंख्यक मतदाताओं में यह भावना मजबूत हो रही है कि वोटों का बिखराव भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है।

मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में भी यही रुझान सामने आ रहा है। स्थानीय स्तर पर लोग मान रहे हैं कि यह समय प्रयोग करने का नहीं, बल्कि एकजुट रहने का है।

TMC को मिल सकता है सीधा फायदा

2021 के चुनाव नतीजों को देखें तो TMC ने मुस्लिम बहुल सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया था। 30% से अधिक अल्पसंख्यक आबादी वाली 89 में से 87 सीटें और 20% से अधिक हिस्सेदारी वाली 112 में से 106 सीटें पार्टी ने जीती थीं।

अब जब तीसरे विकल्प कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, तो विश्लेषकों का मानना है कि TMC को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम समेत कई सामाजिक नेताओं का भी कहना है कि मौजूदा हालात में मतदाता उस पार्टी की ओर झुक रहे हैं, जिसे वे अपने हितों की रक्षा करने वाली मानते हैं।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनावी तस्वीर तेजी से बदल रही है। जहां कुछ समय पहले बहुकोणीय मुकाबले की संभावना दिख रही थी, वहीं अब यह सीधा मुकाबला बनता नजर आ रहा है। आने वाले महीनों में यह रुझान और स्पष्ट होगा कि यह एकजुटता कितनी स्थायी साबित होती है।