पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग ने सुबह से ही सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। एक तरफ मतदान प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर कई जगहों से झड़प, तकनीकी गड़बड़ी और आरोप-प्रत्यारोप की खबरें भी सामने आ रही हैं। 11 बजे तक पश्चिम बंगाल में 41.11% और तमिलनाडु में 37.56% मतदान दर्ज किया गया, जो शुरुआती रुझानों में अच्छी भागीदारी का संकेत देता है।
तेज वोटिंग, लेकिन कई जगह तनाव भी
सुबह 9 बजे तक बंगाल में 18.76% और तमिलनाडु में 17.69% मतदान हुआ था, जो दो घंटे के भीतर तेजी से बढ़ा। बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में वोट डाले जा रहे हैं।
हालांकि, बंगाल के कई इलाकों में हालात पूरी तरह शांत नहीं रहे। मुर्शिदाबाद, मालदा और सिलीगुड़ी जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।
EVM खराबी और बम घटना से बढ़ी चिंता
कूचबिहार और मुर्शिदाबाद में कुछ मतदान केंद्रों पर EVM और VVPAT मशीनों में खराबी की वजह से वोटिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। चुनाव आयोग ने इन घटनाओं पर रिपोर्ट तलब की है।
इसके अलावा, मालदा के नाओदा इलाके में बम विस्फोट की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कुल मिलाकर मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश जारी है।
नेताओं के बयान और आरोप-प्रत्यारोप तेज
वोटिंग के बीच नेताओं के बयान भी सियासी तापमान बढ़ा रहे हैं। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि नंदीग्राम में कुछ मतदाताओं को डराया गया, जबकि अन्य नेताओं ने भी स्थानीय स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए।
दूसरी ओर, तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अन्य नेताओं ने लोगों से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी पर जोर दिया।
सेलिब्रिटी और बड़े नेताओं ने डाला वोट
मतदान के दौरान कई बड़े चेहरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तमिलनाडु में रजनीकांत, कमल हासन, कनिमोझी और पी. चिदंबरम ने वोट डाला। वहीं बंगाल में भी कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान किया और शांतिपूर्ण प्रक्रिया की अपील की।
इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और जनभागीदारी का भी अहम मंच बन गया है। जहां एक ओर सुरक्षा और पारदर्शिता पर नजर है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता मतदान प्रतिशत लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को भी दर्शाता है।
अब सभी की नजरें अगले चरण की वोटिंग और इन शुरुआती घटनाओं के अंतिम परिणामों पर पड़ने वाले असर पर टिकी हैं।


