मोदी फैमिली विवाद में बड़ा ट्विस्ट: दिल्ली हाई कोर्ट ने समीर मोदी का मारपीट केस किया खारिज

मोदी फैमिली विवाद में बड़ा ट्विस्ट: दिल्ली हाई कोर्ट ने समीर मोदी का मारपीट केस किया खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने कारोबारी घराने से जुड़े चर्चित समीर मोदी विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने समीर मोदी द्वारा अपनी मां बीना मोदी, वरिष्ठ वकील ललित भसीन और एक सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ दर्ज कराए गए मारपीट के मामले को रद्द कर दिया। यह फैसला तब आया जब खुद शिकायतकर्ता समीर मोदी ने अदालत में कहा कि वह अपनी शिकायत वापस ले चुके हैं और पक्षों के बीच विवाद अब सुलझ चुका है।

यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं था, बल्कि एक बड़े बिजनेस ग्रुप के नियंत्रण को लेकर चल रही खींचतान से भी जुड़ा रहा है, जिस पर कॉर्पोरेट जगत की नजर बनी हुई थी।

कोर्ट में क्या हुआ, कैसे खत्म हुआ मामला?

सोमवार को जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच के सामने सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि दोनों पक्ष अब आपसी सहमति से आगे बढ़ चुके हैं। खास बात यह रही कि इस समझौते के लिए कोई औपचारिक सेटलमेंट डीड या रकम तय नहीं की गई थी।

कोर्ट ने सीधे समीर मोदी से पूछा कि क्या उन्होंने अपनी शिकायत वापस ली है। इस पर उन्होंने साफ तौर पर हामी भरी। इसके बाद अदालत ने बीना मोदी, ललित भसीन और सुरेंद्र प्रसाद के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा विवाद, कैसे पहुंचा कोर्ट तक?

यह मामला मई 2024 की एक घटना से जुड़ा था, जब गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के जसोला स्थित कार्यालय में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान विवाद हुआ था। समीर मोदी ने आरोप लगाया था कि उन्हें मीटिंग में प्रवेश से रोका गया और इस दौरान उनके साथ मारपीट हुई, जिससे उनकी उंगली में फ्रैक्चर हो गया।

दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जांच में सिर्फ सुरक्षा अधिकारी को आरोपी माना था और बीना मोदी व ललित भसीन के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए थे। हालांकि, समीर मोदी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई की अनुमति दी थी।

परिवार और बिजनेस कंट्रोल की जंग भी रही वजह

यह विवाद सिर्फ एक कथित मारपीट तक सीमित नहीं था। इसके पीछे परिवार के बिजनेस और ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई भी अहम कारण रही है।

समीर मोदी ने अपनी मां पर फैमिली ट्रस्ट के गलत प्रबंधन और उन्हें निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने के आरोप लगाए थे। वहीं, बीना मोदी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

कानूनी लड़ाई से समझौते तक

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बीना मोदी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि यह मामला बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और आरोपित लोग कथित घटना में सीधे शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि समीर मोदी मीटिंग में लंबे समय तक मौजूद रहे, जिससे आरोपों पर सवाल खड़े होते हैं।

आखिरकार, जब शिकायतकर्ता ने खुद ही केस वापस ले लिया, तो अदालत ने भी इसे आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं समझी और पूरे मामले को खत्म कर दिया।

यह फैसला दिखाता है कि बड़े कारोबारी परिवारों के विवाद अदालत तक पहुंचते हैं, लेकिन कई बार समाधान बातचीत से भी निकलता है। कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ आपसी सहमति भी ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभाती है।