ममता की हार पर कांग्रेस में ‘जश्न’ से राहुल नाराज, बोले- यह किसी दल की नहीं, देश की बात है

ममता की हार पर कांग्रेस में ‘जश्न’ से राहुल नाराज, बोले- यह किसी दल की नहीं, देश की बात है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल राज्य, बल्कि देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी 207 सीटों के साथ एक ऐतिहासिक और चमत्कारी प्रदर्शन कर जीत का परचम लहरा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में इस हार को लेकर भारी आक्रोश है। आम तौर पर चुनाव के बाद हार-जीत को स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन इस बार विपक्ष ने एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव तक, सभी प्रमुख नेताओं ने इन नतीजों को ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘वोटों की चोरी’ करार दिया है। एक आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि ये आरोप सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी हैं या भारतीय लोकतंत्र के लिए किसी बड़े संकट का संकेत।

राहुल गांधी की नसीहत: ‘यह किसी पार्टी की नहीं, देश की बात है’

नतीजों के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल मची हुई है। कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता टीएमसी की हार पर राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें सख्त हिदायत दी है। राहुल गांधी का मानना है कि यह समय छोटी-मोटी राजनीति या आपसी प्रतिद्वंद्विता में खुश होने का नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस करना चाहती है।

राहुल ने ममता बनर्जी के उस आरोप का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने 100 से ज्यादा सीटें ‘चुराने’ की बात कही थी। राहुल के मुताबिक, असम और बंगाल में बीजेपी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर जनादेश को प्रभावित किया है। उन्होंने इस पैटर्न को मध्य प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र के पिछले अनुभवों से जोड़ते हुए कहा कि अब संस्थानों की चोरी ही सत्ता में बने रहने का जरिया बन गई है।

अरविंद केजरीवाल की भविष्यवाणी: ‘पंजाब के लोग करेंगे मोदी सरकार का अंत’

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बंगाल के हालात को एक ‘तांडव’ के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायकों को तोड़कर या नेताओं को जेल भेजकर जनतंत्र की हत्या कर रही है। केजरीवाल ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे जेल में थे, तब उनकी विधानसभा में हजारों वोट कटवा दिए गए।

केजरीवाल ने एक बड़ी राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए कहा कि मोदी सरकार का अंत अब करीब है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब के आगामी चुनाव इस सरकार के लिए आखिरी साबित होंगे और वहां की जनता इस शासन को उखाड़ फेंकेगी। उनके मुताबिक, बंगाल में जो कुछ भी हुआ, वह उसी सिलसिले की एक कड़ी है जो बिहार और महाराष्ट्र में पहले ही देखा जा चुका है।

अखिलेश यादव का कड़ा प्रहार: ‘इतिहास का सबसे काला दिन’

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बंगाल के नतीजों को राजनीतिक इतिहास का ‘घनघोर काला दिन’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में जनमत की खुली लूट हुई है और सत्ताधारी राजनीति अब मर्यादा के ‘पाताल’ से भी नीचे गिर गई है। अखिलेश ने विशेष रूप से मतगणना के दौरान केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसकी तुलना 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से करते हुए कहा कि जैसा घपला कन्नौज में हुआ था, ठीक वैसा ही आज बंगाल में दोहराया गया है। उनके शब्दों में, पूरा देश इस समय आक्रोशित है क्योंकि चुनावी व्यवस्था अपनी साख खो रही है।

नतीजों की हकीकत: 77 से 207 तक का सफर

इन तमाम आरोपों के बीच अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो बंगाल की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। पिछले विधानसभा चुनाव में महज 77 सीटों पर सिमटने वाली बीजेपी ने इस बार 207 सीटों पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस जो पिछली बार 215 सीटों के साथ सत्ता में थी, वह इस बार रक्षात्मक मुद्रा में है। इन नतीजों ने बंगाल की जमीन पर एक नए राजनीतिक ध्रुवीकरण को जन्म दे दिया है, जहां अब लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि चुनावी निष्पक्षता के दावों की भी है।