पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता का चेहरा बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन का अंत कर दिया है। शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया। अब शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वे राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री होंगे।
यह बदलाव आम बंगालवासियों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और औद्योगिक निवेश जैसे मुद्दों पर नई सरकार से बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी हैं। शुभेंदु अधिकारी का नाम पिछले कई सालों से बंगाल की राजनीति में चर्चा में रहा है, लेकिन अब वे पूरे राज्य की बागडोर संभालने जा रहे हैं।
शुभेंदु का राजनीतिक सफर: कांग्रेस से भाजपा तक
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के करकुली में महिष्य क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके पिता शिशिर अधिकारी विधानसभा और लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उनके भाई सौमेंदु अधिकारी कांथी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं, जबकि दिव्येंदु अधिकारी भी संसद सदस्य रह चुके हैं।
शुभेंदु ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1995 में कांग्रेस से शुरू की। 2006 में वे कांथी दक्षिण से विधायक चुने गए और उसी साल कांथी म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन भी बने। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में नंदीग्राम के जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। बाद में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2009 में तमलुक से लोकसभा सांसद चुने गए। 2016 में वे नंदीग्राम से विधायक बने और ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री बने।
2020 में भाजपा में शामिल हुए, फिर बदला राजनीतिक समीकरण
नवंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी और अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। कहा जाता है कि यह फैसला ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मतभेद के कारण लिया गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को मात्र 1,956 वोटों से हराकर सनसनी मचा दी और भाजपा विधायक दल के नेता बने।
2026 के चुनाव में उन्होंने दोहरी चुनौती स्वीकार की। नंदीग्राम के साथ-साथ ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। उनकी यह जीत भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई।
नया मुख्यमंत्री, नई उम्मीदें
शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल की सत्ता संभालने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनका अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और ममता विरोधी छवि उन्हें इस पद के लिए मजबूत बनाती है। नई सरकार के गठन के साथ केंद्र और राज्य में समन्वय बढ़ने की उम्मीद है, जिससे राज्य के विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
शनिवार का शपथ ग्रहण समारोह काफी भव्य होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख नेता इसमें शामिल होंगे। बंगाल के इतिहास में यह एक यादगार दिन साबित होगा।
आम नागरिक अब देखना चाहते हैं कि नई सरकार राज्य की पुरानी समस्याओं का कितना जल्द समाधान करती है और बंगाल को प्रगति की नई राह पर ले जाती है। शुभेंदु अधिकारी का यह सफर कांग्रेस से शुरू होकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है, जो बंगाल की बदलती राजनीति का प्रतीक बन गया है।


