डीजल महंगा तो मालभाड़ा भी बढ़ेगा! ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हलचल, आम आदमी की रोजमर्रा चीजें होंगी महंगी

डीजल महंगा तो मालभाड़ा भी बढ़ेगा! ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हलचल, आम आदमी की रोजमर्रा चीजें होंगी महंगी

भारत में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर अब सड़कों पर दिखने लगा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियां और ट्रक ऑपरेटर्स चिंतित हैं क्योंकि डीजल के दाम बढ़ने से उनका परिचालन खर्च तेजी से बढ़ रहा है। अगर यह बढ़ोतरी जारी रही तो माल ढुलाई के रेट्स में इजाफा होना तय है, जिसका सीधा बोझ अंत में आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।

रोजाना बाजार से सब्जी-फल, दूध, दवा या ऑनलाइन सामान मंगवाने वाले आम नागरिक को इस बढ़त का असर जल्द महसूस होने वाला है। क्योंकि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से ज्यादातर वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होता है।

हर 5 रुपये की बढ़ोतरी पर 2.5-2.8% महंगा हो सकता है मालभाड़ा

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि डीजल की कीमत में हर 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर ट्रांसपोर्टर्स को मुनाफा बचाने के लिए मालभाड़ा दरों में 2.5 से 2.8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

वर्तमान में ट्रांसपोर्ट कारोबार पहले से ही दबाव में है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना हुआ है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां अभी पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हुए हैं, लेकिन इसकी कीमत वे भारी नुकसान उठाकर चुका रही हैं।

तेल कंपनियों पर 1,000 करोड़ रोज का बोझ

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। इस तिमाही में अंडर-रिकवरी 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां हर महीने हजारों करोड़ का घाटा सहन कर रही हैं।

ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स के लिए डीजल कुल खर्च का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। छोटे ट्रक मालिकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। बाजार में ट्रकों की संख्या ज्यादा है, जबकि माल ढुलाई की मांग कमजोर बनी हुई है। कई ऑपरेटर्स कह रहे हैं कि वे बढ़ी हुई लागत का 80 प्रतिशत भी ग्राहकों से वसूल नहीं कर पा रहे, जिससे उनका मुनाफा लगातार घट रहा है।

लॉजिस्टिक्स स्लोडाउन और महंगाई का खतरा

क्रिसिल का पैन-इंडिया फ्रेट इंडेक्स अप्रैल में घटकर 100.5 रह गया, जो मार्च में 101.4 था। FASTag ट्रांजैक्शन में भी गिरावट दर्ज की गई है। टायर, टोल, रखरखाव और ड्राइवर सैलरी जैसे अन्य खर्च भी बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डीजल महंगा हुआ तो इसका असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से किराना, निर्माण सामग्री, दवाइयां और औद्योगिक उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे कुल महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि यहां लागत बढ़ती रही और मुनाफा घटता रहा तो निवेश प्रभावित होगा और रोजगार के अवसर भी कम हो सकते हैं। आम आदमी के नजरिए से देखें तो ईंधन की कीमतों में बदलाव सीधे उनकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी को छूता है।

सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन लंबे समय तक यह दबाव बरकरार नहीं रह सकता। आने वाले दिनों में मालभाड़ा और खुदरा महंगाई दोनों पर नजर रखना होगा।