केरल में दस साल बाद सत्ता का रुख बदल गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने जा रहे हैं। लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की निर्णायक जीत के बाद गठबंधन एक बार फिर सत्ता में लौटा है। सतीशन के साथ 20 मंत्री भी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में पदभार संभालेंगे। यह समारोह न सिर्फ केरल की राजनीति बल्कि पूरे दक्षिण भारत की राजनीतिक दिशा पर असर डाल सकता है।
एक दशक बाद यूडीएफ की वापसी
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की अगुवाई वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) को सत्ता से बेदखल कर दिया। करीब पांच साल विपक्ष में रहने के बाद सतीशन (61) अब मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता उन्हें कांग्रेस का जनाधार फिर से मजबूत करने का श्रेय देते हैं।
सतीशन को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था। इसके बाद उन्होंने गठबंधन सहयोगी दलों के साथ नए मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बैठकें कीं। इस बार यूडीएफ की जीत को जनादेश परिवर्तन की मजबूत इच्छा के रूप में देखा जा रहा है। आम नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि नई सरकार उनके रोजमर्रा के मुद्दों जैसे रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देगी।
शपथ ग्रहण समारोह की जोरदार तैयारी
सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। एक विशाल मंच बनाया गया है। हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं, राष्ट्रीय नेताओं और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के लिए बैठने की व्यवस्था की गई है। बारिश की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के साथ-साथ मौसम से बचाव के पूरे इंतजाम किए गए हैं।
तिरुवनंतपुरम में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। बड़ी संख्या में वीआईपी और समर्थकों के आने के कारण विशेष यातायात प्रबंधन भी किया गया है। समारोह में सभी 140 विधायकों को आमंत्रित किया गया है। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण भेजा गया है।
बड़े नेताओं के आने की संभावना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे के समारोह में शामिल होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय भी आमंत्रित हैं और उनकी उपस्थिति की पुष्टि आज रविवार को हो सकती है।
यह समारोह केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। एलडीएफ के शासनकाल के बाद यूडीएफ की सरकार कितनी प्रभावी साबित होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। आम लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। बेहतर शासन, विकास कार्यों में तेजी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने जैसे मुद्दों पर नई सरकार की परीक्षा होगी।
सतीशन के अनुभवी नेतृत्व में नया मंत्रिमंडल राज्य को किस दिशा में ले जाता है, इस पर पूरे देश की नजर है। समारोह के बाद मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आगामी नीतिगत फैसले केरल की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। इस वक्त केरल के लाखों नागरिक उम्मीद और उत्सुकता के साथ इस बदलाव को देख रहे हैं।


