गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) पर एक नया आरोप सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि दिल्ली से सूरत तक हवाला के जरिए 1.2 करोड़ रुपये भेजे गए, जिन्हें कथित तौर पर पार्टी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने रिसीव किया। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
दिल्ली से सूरत तक कैश ट्रेल का दावा
क्राइम ब्रांच और उमरा पुलिस के मुताबिक, यह रकम दिल्ली के एक कारोबारी हिमांशु पाहूजा द्वारा भेजी गई थी। सूरत में इसे कथित तौर पर AAP से जुड़े कार्यकर्ता आकाश मिश्रा और अजय तिवारी ने प्राप्त किया।
डीसीपी (क्राइम) भावेश रोजिया के अनुसार, इस लेनदेन की जानकारी पुलिस को गुप्त इनपुट के जरिए मिली थी। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस रकम का इस्तेमाल स्थानीय चुनावी गतिविधियों में किया जाना था।
जांच का दायरा बढ़ा, इनकम टैक्स भी अलर्ट
पुलिस ने इस मामले की जानकारी आयकर विभाग को भी दे दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक लेनदेन का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
जांच में करीब 10 अन्य लोगों और कुछ अंगड़िया कारोबारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क दिल्ली से फंड भेजने और सूरत में उसे वितरित करने के लिए काम कर रहा था।
कौन हैं जांच के घेरे में आए लोग
जांच में सामने आए नामों में हिमांशु पाहूजा को इस नेटवर्क का अहम कड़ी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह दिल्ली के जनकपुरी इलाके का निवासी है और राजनीतिक संपर्क भी रखता है।
वहीं, आकाश मिश्रा को एक वरिष्ठ AAP नेता का करीबी और पूर्व में जुड़े पदाधिकारी के रूप में बताया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि मिश्रा सूरत में रहकर फंड रिसीव करने और आगे बांटने की भूमिका निभाता था। अजय तिवारी को उसका सहयोगी बताया गया है, जो इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।
CCTV फुटेज से मिले अहम संकेत
क्राइम ब्रांच ने स्थानीय अंगड़िया ऑपरेटरों से सीसीटीवी फुटेज भी हासिल किए हैं। इन फुटेज में कुछ लोग बड़ी मात्रा में नकदी गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का दावा है कि यह वही रकम है, जिसे दिल्ली से भेजा गया था।
हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी फंडिंग और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और तेज हो सकती है, जिससे इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।


