पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका पर कांग्रेस का हमला: “मोदी सरकार की रणनीति फेल, दुनिया में नई इमेज बना रहा पाक”

पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका पर कांग्रेस का हमला: “मोदी सरकार की रणनीति फेल, दुनिया में नई इमेज बना रहा पाक”

भारत की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि जिस पाकिस्तान को भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश करता रहा, वही अब वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभाता दिख रहा है।

यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के नजरिए से देखें तो यह भारत की वैश्विक स्थिति और कूटनीतिक प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है।

कांग्रेस का आरोप: कूटनीति में बदलाव की जरूरत

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदा रणनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफल नहीं रही।

उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भूमिका निभा रहा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि यह स्थिति भारत की कूटनीतिक पकड़ कमजोर होने का संकेत देती है।

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल और तंज

जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश को पहले ‘दलाल’ कहा गया था, वही अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करता नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद वैश्विक मंच पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से अपने कर्ज का प्रबंधन किया है, जो यह दर्शाता है कि उसे बाहरी समर्थन मिल रहा है।

आसिम मुनीर और ट्रंप का जिक्र

कांग्रेस ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर भी टिप्पणी की। जयराम रमेश के मुताबिक, मुनीर का अमेरिकी नेतृत्व, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के साथ बढ़ता प्रभाव भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क के साथ बेहतर तालमेल बैठाया है, जबकि भारत इस मामले में पीछे रह गया है।

पुरानी तुलना और नई चिंता

कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि 2008 मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी। इसके विपरीत, मौजूदा हालात में पाकिस्तान को नई पहचान मिलती दिख रही है।

यह पूरा विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच भारत की रणनीति पर गंभीर चर्चा हो रही है। आने वाले समय में यह बहस और तेज हो सकती है, क्योंकि विदेश नीति का असर सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि देश की वैश्विक छवि और हितों पर भी पड़ता है।