नई दिल्ली। भारत की आईटी इंडस्ट्री में नई लहर आ रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नौकरियों में 15 से 20 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, पारंपरिक आईटी सेक्टर के कुछ हिस्सों में बदलाव की सख्त जरूरत है। CII के वार्षिक बिजनेस समिट में मंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे Nasscom के साथ मिलकर ऐसे टैलेंट तैयार करें जो इस नई टेक्नोलॉजी क्रांति का पूरा फायदा उठा सकें। यह खबर उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो आईटी और टेक जॉब्स की तलाश में हैं।
AI सेक्टर में तेज रफ्तार, बाकी आईटी में बदलाव जरूरी
अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कहा कि वे आईटी इंडस्ट्री से लगातार संपर्क में हैं। उनके अनुसार, एआई से जुड़ी नौकरियों की मांग अच्छी खासी बढ़ रही है। लेकिन पारंपरिक सॉफ्टवेयर सर्विसेज और कुछ अन्य क्षेत्रों में अब पुरानी सोच को बदलना होगा।
मंत्री ने उद्योग जगत को सुझाव दिया कि Nasscom के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर जोर दें। इससे युवाओं को न सिर्फ नौकरियां मिलेंगी, बल्कि भारत ग्लोबल टेक हब के रूप में और मजबूत बनेगा। आम युवा और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि एआई स्किल्स सीखने वाले युवाओं को बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ के अवसर मिल सकते हैं।
डेटा सेंटर्स में भारी निवेश, टैक्स छूट का असर
सरकार ने 2047 तक डेटा सेंटर्स को टैक्स छूट देने का फैसला किया है। मंत्री ने बताया कि इससे इस क्षेत्र में भारी निवेश आ रहा है। करीब 200 अरब डॉलर का निवेश डेटा सेंटर्स में आने की उम्मीद है।
यह निवेश न सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेगा। वैश्विक कंपनियां अब भारत को डेटा हब के रूप में देख रही हैं, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा।
HP ने शुरू किया AI सर्वर उत्पादन, Google को भी आमंत्रण
अश्विनी वैष्णव ने खुशखबरी देते हुए बताया कि HP ने भारत में AI सर्वर बनाने का काम शुरू कर दिया है। सरकार Google और अन्य बड़ी कंपनियों को भी स्थानीय स्तर पर सर्वर उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
इसके अलावा, देश तीन बड़े सबसी केबल नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रहा है। पहला केबल विशाखापट्टनम से ऑस्ट्रेलिया और फिर अमेरिका जाएगा। दूसरा दक्षिण भारत से मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका के पूर्वी तट तक जाएगा। तीसरा केप ऑफ गुड होप होते हुए अमेरिका पहुंचेगा।
ये नेटवर्क भारत को मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देंगे और भविष्य में डेटा ट्रांसमिशन को तेज, सस्ता और सुरक्षित बनाएंगे।
आम भारतीय पर क्या होगा असर?
इन विकासों से युवाओं को एआई, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर मिलेंगे। कंपनियों के लोकल प्रोडक्शन से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा सेंटर से डिजिटल सर्विसेज सस्ती और बेहतर हो सकती हैं।
मंत्री का संदेश साफ है — पुरानी राहों से हटकर नई टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। अगर उद्योग और सरकार साथ मिलकर काम करें तो भारत अगले कुछ सालों में एआई और डिजिटल इकोनॉमी में विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति बना सकता है।


