सिद्धारमैया का पीएम मोदी पर तीखा हमला: “बीजेपी कर्नाटक में केकड़ों की तरह एक-दूसरे को खींच रही है”

सिद्धारमैया का पीएम मोदी पर तीखा हमला: “बीजेपी कर्नाटक में केकड़ों की तरह एक-दूसरे को खींच रही है”

बेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है। पीएम के हालिया भाषण को जवाब देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक में भाजपा ‘राजनीतिक आत्मघात’ कर रही है। उन्होंने भाजपा की स्थिति को टोकरी में बंद केकड़ों से जोड़कर描述 किया, जो एक-दूसरे को नीचे खींच रहे हैं। यह विवाद राज्य की राजनीति को और तीखा बनाने वाला है, जिसका असर आम कर्नाटकवासियों की जिंदगी और राज्य की स्थिरता पर पड़ सकता है।

“बीजेपी खुद कर रही है राजनीतिक खुदकुशी”

सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा के अंदर आधा दर्जन गुट पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और उनके परिवार का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब वह उन नेताओं के पैरों में गिर रही है जिन्हें खुद निलंबित किया था।

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से सवाल किया कि उनका रविवार का भाषण प्रधानमंत्री के रूप में था या फिर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष या विपक्षी नेता के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पहले अपने “ढहते मकान” को संभालना चाहिए, उसके बाद कांग्रेस पर टिप्पणी करनी चाहिए।

पीएम के ‘परजीवी पार्टी’ वाले बयान पर पलटवार

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर कर्नाटक में आंतरिक कलह का आरोप लगाते हुए उसे ‘परजीवी पार्टी’ बताया था और सुशासन देने में नाकाम बताया था। सिद्धारमैया ने इस पर तीखा जवाब देते हुए कहा कि पीएम का भाषण झूठ, नफरत और ईर्ष्या से भरा था, जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पीएम मोदी की टिप्पणियों से कांग्रेस सरकार की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नाकामी और कर्नाटक में भाजपा की खस्ता हालत जाहिर होती है।

आर्थिक अपील पर भी साधा निशाना

सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री की हालिया अपील पर भी हमला बोला। पीएम ने लोगों से सोने की खरीदारी कम करने, ईंधन की खपत घटाने, विदेश यात्राएं कम करने और उर्वरक कम इस्तेमाल करने की अपील की थी।

मुख्यमंत्री ने पूछा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और गरीबी मिटाने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री अब लोगों से संयम बरतने को क्यों कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की ‘भ्रमित’ विदेश नीति के कारण ही लोगों को बढ़ती महंगाई, खासकर ईंधन, रसोई गैस और खाद्य तेल की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

आम कर्नाटकवासी के लिए क्या मायने?

यह सियासी घमासान राज्य की कांग्रेस सरकार के लिए चुनौती है, लेकिन साथ ही भाजपा की आंतरिक कलह को भी उजागर करता है। अगर यह विवाद बढ़ा तो आगामी चुनावों और विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। आम लोगों को उम्मीद है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों विकास, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान दें, बजाय व्यक्तिगत हमलों के।

सिद्धारमैया का यह आक्रामक रुख कांग्रेस को मजबूती देने की कोशिश लगता है, जबकि भाजपा इसे मौका मानकर हमला बोल सकती है। कर्नाटक की राजनीति में अगले कुछ दिनों में और हलचल देखने को मिल सकती है।