Airtel-Vi को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, ₹11,000 करोड़ से ज्यादा के स्पेक्ट्रम चार्ज पर फिलहाल सरकार को झटका

Airtel-Vi को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, ₹11,000 करोड़ से ज्यादा के स्पेक्ट्रम चार्ज पर फिलहाल सरकार को झटका

भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज यानी OTSC के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से लगाए गए पुराने स्पेक्ट्रम चार्ज की मांग को रद्द कर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने केंद्र की अपील पर नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यानी कंपनियों को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन करीब 14 साल पुराना यह विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार, कंपनियों को तुरंत राहत

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 जून के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की अपील की गई थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 2008 से 6.2 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने पर लगाए गए रेट्रोस्पेक्टिव यानी पिछली तारीख से लागू किए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज की मांग को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश के तहत कंपनियों की बैंक गारंटी भी रिलीज की जानी है। केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि इन बैंक गारंटियों की कीमत करीब 3,300 करोड़ रुपये है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस रिलीज पर रोक नहीं लगाई।

इस फैसले का असर कंपनियों की बैलेंस शीट पर भी पड़ सकता है। एयरटेल ने 9 जून को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया था कि हाई कोर्ट के फैसले से उसे करीब 8,414 करोड़ रुपये की राहत का अनुमान है। कंपनी की FY26 वार्षिक रिपोर्ट में मूल OTSC मांग पर मार्च के अंत तक करीब 12,137 करोड़ रुपये की जमा ब्याज देनदारी भी दर्ज थी।

वोडाफोन आइडिया के मामले में हाई कोर्ट ने करीब 2,113 करोड़ रुपये की OTSC मांग वाले नोटिस रद्द किए थे। कंपनी की FY26 रिपोर्ट में इन चार्ज से जुड़ा करीब 8,780 करोड़ रुपये का प्रावधान दर्ज था।

सरकार बनाम टेलीकॉम कंपनियां, असली विवाद क्या है?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि स्पेक्ट्रम देश का बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है और सरकार इसे जनता की ओर से ट्रस्ट के तौर पर रखती है। सरकार का तर्क था कि टेलीकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम कई मामलों में बाजार मूल्य से कम दर पर मिला और OTSC के जरिए उसकी वास्तविक कीमत वसूलने की कोशिश की गई।

केंद्र ने यह भी कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला मद्रास हाई कोर्ट के 2016 के फैसले से अलग है। मद्रास हाई कोर्ट ने एयरसेल के खिलाफ करीब 3,273 करोड़ रुपये की OTSC मांग को बरकरार रखा था। इसी आधार पर केंद्र चाहता है कि मामले को स्पेक्ट्रम चार्ज से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में लंबित दूसरे मामलों के साथ जोड़ा जाए।

दूसरी तरफ एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने सरकार की दलील का विरोध किया। दोनों कंपनियों की ओर से कहा गया कि उनके लाइसेंस समझौतों और मौजूदा कानून में पिछली तारीख से ऐसा अतिरिक्त चार्ज लगाने का कोई आधार नहीं है।

वोडाफोन आइडिया की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वर्षों तक चलने वाली ऐसी मांगें कंपनियों की बैलेंस शीट पर लगातार दबाव डालती हैं। एयरटेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी रेट्रोस्पेक्टिव चार्ज का विरोध किया।

2012 से शुरू हुआ था विवाद, 13 साल चली कानूनी लड़ाई

इस पूरे मामले की जड़ 2012 में है। उस समय केंद्र सरकार ने 6.2 MHz से अधिक स्पेक्ट्रम होल्डिंग पर जुलाई 2008 से प्रभावी वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाने का फैसला किया था। इसके बाद दूरसंचार विभाग यानी DoT ने कई कंपनियों को अतिरिक्त भुगतान के लिए डिमांड नोटिस जारी किए।

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत कंपनियों ने 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि स्पेक्ट्रम हासिल करते समय वे एंट्री फीस, लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज पहले ही चुका रहे थे। ऐसे में बाद में पिछली तारीख से नया चार्ज लगाना उनके लाइसेंस समझौते और कानून के अनुरूप नहीं है।

जनवरी 2013 में हाई कोर्ट ने कंपनियों को अंतरिम राहत दी। इसके बाद मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा। आखिरकार जून 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार की मांगों को रद्द कर दिया और कहा कि लाइसेंस समझौतों या कानून में इस तरह पिछली तारीख से OTSC लगाने का आधार नहीं है।

कंपनियों के लिए राहत, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी

शुक्रवार का सुप्रीम कोर्ट आदेश टेलीकॉम कंपनियों के लिए तत्काल राहत लेकर आया है, लेकिन इसे मामले का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता। केंद्र की अपील पर सुप्रीम कोर्ट अब आगे सुनवाई करेगा। यानी भविष्य में इस चार्ज को लेकर अदालत का अंतिम रुख क्या होगा, यह अभी तय होना बाकी है।

बाजार में भी शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे भारती एयरटेल का शेयर लगभग 0.38 फीसदी बढ़कर 1,955.50 रुपये और वोडाफोन आइडिया का शेयर करीब 0.55 फीसदी बढ़कर 12.70 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

इस मामले की अहमियत सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है। टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ने वाला बड़ा वित्तीय बोझ कंपनियों की निवेश क्षमता, नेटवर्क विस्तार और वित्तीय योजना को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को अदालत से मिली राहत से तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन OTSC विवाद की अंतिम दिशा अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई से तय होगी।