अलीगंज अग्निकांड जांच में बड़ा एक्शन! नगर आयुक्त समेत 18 IAS-PCS अफसरों पर जांच की आंच

अलीगंज अग्निकांड जांच में बड़ा एक्शन! नगर आयुक्त समेत 18 IAS-PCS अफसरों पर जांच की आंच

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच अब बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने वर्ष 2016 से 2024 के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में तैनात अधिकारियों का ब्योरा मांगा था। इसके बाद एलडीए ने नगर आयुक्त गौरव कुमार समेत 18 IAS और PCS अधिकारियों के नाम जांच एजेंसी को उपलब्ध करा दिए हैं।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिस भवन में आग लगी, उसके निर्माण, मानचित्र स्वीकृति, निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

इन अधिकारियों के नाम सूची में शामिल

एसआईटी को भेजी गई सूची में नगर आयुक्त गौरव कुमार के अलावा पूर्व उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, शिवाकांत द्विवेदी, सत्येंद्र सिंह यादव, पूर्व सचिव एमपी सिंह, पवन गंगवार, श्रीशचंद्र वर्मा तथा संयुक्त सचिव रह चुकीं रितु सुहास सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें कुछ अधिकारी वर्तमान में विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी (DM) के पद पर तैनात हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

PCS और प्राधिकरण सेवा के अधिकारी भी जांच के दायरे में

जांच के दायरे में मौजूदा और पूर्व पीसीएस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें विपिन शिवहरे, प्रभाकर सिंह, संगीता राघव, सुशील प्रताप सिंह, अमित राठौर, श्रद्धा चौधरी, प्रिया सिंह, डीके सिंह और वीबी मिश्रा शामिल हैं।

इसके अलावा प्राधिकरण सेवा के माधवेश कुमार, रविनंदन सिंह, राजीव कुमार और स्थानीय निकाय सेवा के अतुल कृष्ण सिंह के नाम भी एसआईटी को भेजे गए हैं।

70 से अधिक इंजीनियर और अधिकारी भी जांच में

एसआईटी को भेजी गई सूची में 52 जूनियर इंजीनियर एवं सहायक अभियंता तथा 14 अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसी इन अधिकारियों की तैनाती अवधि, फाइलों पर की गई टिप्पणियों और कार्रवाई के रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी।

नगर आयुक्त ने क्या कहा?

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी है। उन्होंने कहा कि उत्तरदायित्व तय करने के लिए किसी अधिकारी का कम से कम 90 दिन तक संबंधित पद पर कार्य करना जरूरी होता है, जबकि उन्होंने एलडीए में केवल 11 दिन काम किया था। उन्होंने कहा कि जब जांच एजेंसी उनसे जवाब मांगेगी, तब वे अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

नोट: फिलहाल एसआईटी ने केवल संबंधित अधिकारियों के नाम और सेवा विवरण जांच के लिए मांगे हैं। किसी भी अधिकारी के खिलाफ अभी दोष तय नहीं किया गया है। अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।