उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के नाम पर कथित ‘डमी स्कूल रैकेट’ का मामला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ के एक स्कूल और उसी प्रबंधन से जुड़ी कोचिंग एकेडमी की जांच करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट के सामने ऐसे आरोप आए हैं कि छात्र एक संस्थान में NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, जबकि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उन्हें किसी दूसरे स्कूल में CBSE के तहत रजिस्टर्ड दिखाया जा रहा था। अदालत ने इसे शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी से जुड़ा गंभीर मामला माना है। अब सरकार को जांच कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। हालांकि, कथित रैकेट से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही होगी।
क्या है डमी स्कूल का पूरा मामला? हाईकोर्ट ने क्यों दिखाई सख्ती
जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ अबू हुज़ैफ़ा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामला उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ दायर किया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने ऐसे तथ्य रखे गए, जिनसे छात्रों के स्कूल में वास्तविक दाखिले और उनके नाम पर दर्ज शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर सवाल खड़े हुए।
अदालत के मुताबिक, रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि आजमगढ़ के फड़गुड़िया गांव में स्थित हीरा पब्लिक स्कूल और उसी प्रबंधन के तहत चल रही कोचिंग एकेडमी की भूमिका की जांच जरूरी है। आरोप है कि संस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रेजिडेंशियल कोचिंग चला रहा था, जबकि छात्रों को किसी दूसरे स्कूल में रजिस्टर्ड दिखाया जा सकता था।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि NEET, IIT-JEE और CLAT जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अक्सर कोचिंग में काफी समय बिताते हैं। ऐसे में स्कूल में दाखिले, उपस्थिति और बोर्ड रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर असर डाल सकती है।
छात्र ने कहा- कभी स्कूल में दाखिला ही नहीं लिया, फिर रिकॉर्ड में नाम कैसे आया?
याचिकाकर्ता अबू हुज़ैफ़ा की ओर से पेश वकील मोहम्मद कुमेल हैदर ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जौनपुर के शहाना इंटरनेशनल स्कूल में कभी पढ़ाई नहीं की। उनके मुताबिक, हुज़ैफ़ा ने न तो इस स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन किया, न वहां कक्षाओं में शामिल हुए और न ही कोई फीस जमा की।
इसके बावजूद, याचिका के अनुसार, स्कूल के रिकॉर्ड में उन्हें CBSE व्यवस्था के तहत कक्षा 11 का रजिस्टर्ड छात्र दिखाया गया था। याचिकाकर्ता ने इस रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि रिकॉर्ड में दाखिले का आवेदन, फीस की रसीद, पहचान पत्र, उपस्थिति का ब्योरा या उनके हस्ताक्षर जैसे जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
याचिका में यह भी बताया गया कि हुज़ैफ़ा फड़गुड़िया के एक हॉस्टल में रह रहे थे। वह 5 जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक किसी दूसरे संस्थान में असेसमेंट यानी मूल्यांकन परीक्षाओं में शामिल हो रहे थे।
वहीं, शहाना इंटरनेशनल स्कूल के रिकॉर्ड में उनके दाखिले की तारीख 12 अगस्त 2025 दर्ज होने का दावा किया गया। याचिकाकर्ता ने इसी अंतर को आधार बनाकर रजिस्ट्रेशन की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया। उनका तर्क है कि जब वह पहले से दूसरे संस्थान में पढ़ाई और मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल थे, तो दूसरे स्कूल में उनका दाखिला कैसे दर्ज हुआ?
आजमगढ़ के स्कूल और कोचिंग एकेडमी की होगी जांच
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड ऐसे संभावित मामले की ओर इशारा करते हैं, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को एक संस्थान में कोचिंग दी जाती है, जबकि उनके नाम पर किसी दूसरे स्कूल में दाखिला दर्ज हो सकता है।
इसी आधार पर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को आजमगढ़ के हीरा पब्लिक स्कूल और संबंधित कोचिंग एकेडमी के कामकाज की जांच करने का निर्देश दिया है। सरकार को स्कूल के प्रबंधन की भूमिका की पड़ताल करने के साथ-साथ जौनपुर के शहाना इंटरनेशनल स्कूल से उसके कथित संबंध की भी जांच करनी होगी।
कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही, रेस्पॉन्डेंट नंबर 2 यानी प्रतिवादी संख्या 2 का व्यक्तिगत हलफनामा भी निर्धारित समय में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह जांच केवल एक छात्र के दाखिले तक सीमित नहीं है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि क्या दूसरे छात्रों के नाम पर भी इसी तरह के रिकॉर्ड तैयार किए गए थे। फिलहाल, ऐसा होने की पुष्टि नहीं हुई है।
2 नवंबर को अगली सुनवाई, प्रिंसिपल और मैनेजर को भी बुलाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट और प्रतिवादी संख्या 2 का व्यक्तिगत हलफनामा 2 नवंबर 2026 तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित संस्थान के प्रिंसिपल और मैनेजर को भी अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने को कहा है।
अब मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों का सामने आना होगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि छात्र के नाम पर दर्ज रजिस्ट्रेशन किस आधार पर किया गया और स्कूल तथा कोचिंग प्रबंधन की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं।
अभिभावकों के लिए भी यह मामला एक अहम सवाल खड़ा करता है। बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग में दाखिला दिलाते समय स्कूल में वास्तविक प्रवेश, बोर्ड रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक दस्तावेजों की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। केवल कोचिंग में दाखिला मिल जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि स्कूल से जुड़ी सभी औपचारिकताएं भी सही तरीके से पूरी हुई हैं।
फिलहाल, Abu Huzaifa vs. State of Uttar Pradesh and 5 Others मामले में हाईकोर्ट ने जांच का रास्ता साफ किया है। कथित डमी स्कूल रैकेट की वास्तविक स्थिति जांच और अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।



