कोरोना में जान गंवाने वाले लाइनमैन के परिवार को 50 लाख क्यों नहीं मिले? हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव से मांगा जवाब

कोरोना में जान गंवाने वाले लाइनमैन के परिवार को 50 लाख क्यों नहीं मिले? हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव से मांगा जवाब

गोरखपुर: कोरोना महामारी के दौरान बिजली आपूर्ति बहाल करते समय जान गंवाने वाले लाइनमैन के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता नहीं मिलने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (राजस्व) से व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि कोर्ट के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।

मामला गोरखपुर के गोपालापुर निवासी विद्युत विभाग के लाइनमैन विकिलेश गौड़ का है। उनकी 10 मई 2021 को कोरोना संक्रमण के दौरान बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान मृत्यु हो गई थी। जिला प्रशासन ने उन्हें समेत 15 कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर मानते हुए शासन को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की संस्तुति भेजी थी।

बाद में 14 कर्मचारियों के परिजनों को 50 लाख रुपये की सहायता मिल गई, लेकिन विकिलेश गौड़ के परिवार को भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, दो अलग-अलग जिलाधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि विकिलेश फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में कार्य कर रहे थे।

करीब दो वर्षों तक पत्राचार के बाद 28 जुलाई 2023 को शासन ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि विकिलेश गौड़ फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में नहीं आते। इस दौरान उनके पिता निर्मल गौड़ लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे। अन्य कर्मचारियों के परिवारों को सहायता मिलने और अपने बेटे के मामले में न्याय न मिलने से आहत होकर उनकी भी मृत्यु हो गई।

इसके बाद विकिलेश गौड़ की पत्नी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने 28 जुलाई 2023 के शासनादेश को निरस्त करते हुए एक माह के भीतर 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश दिया था। अब अदालत ने प्रमुख सचिव (राजस्व) को 21 जुलाई तक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के लिए भी कहा गया है।